Budget 2026-27: किसानों को बड़ा तोहफा, 500 नए तालाब का होगा निर्माण.. पशुपालकों के लिए भी गुड न्यूज
Budget 2026-27 में कृषि, मछली पालन और पशुपालन को मजबूत करने पर जोर दिया गया है. एकीकृत खेती, नए सरोवर, डेयरी और पोल्ट्री योजनाओं से ग्रामीण आय बढ़ाने का लक्ष्य है. क्रेडिट लिंक सब्सिडी और बेहतर सुविधाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इससे किसानों और युवाओं को स्थायी काम मिलेगा.
Budget 2026-27 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitha raman) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मछली पालन, पशुपालन, पारंपरिक चिकित्सा और ऑरेंज इकोनॉमी पर खास जोर दिया है. बजट का मकसद खेती की उत्पादकता बढ़ाना, गांवों में नए रोजगार के अवसर पैदा करना और किसानों व युवाओं की आमदनी को मजबूत करना है. सरकार की ये पहल खेती से जुड़े क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक और निवेश से जोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
मछली पालन को मिलेगा नया विस्तार
वित्त मंत्री ने बताया कि मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत खेती मॉडल के तहत 500 अलग-अलग तरह के सरोवर विकसित किए जाएंगे. इन सरोवरों में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन किया जाएगा, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी. इससे छोटे और सीमांत किसानों को अतिरिक्त आमदनी का मौका मिलेगा. मछली पालन से जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे.
पशुपालन और डेयरी सुविधाओं पर जोर
बजट 2026-27 में पशुपालन को ग्रामीण विकास का अहम आधार बताया गया है. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा दिया जाएगा और पशुधन विकास के लिए डेयरी सुविधाएं लागू होंगी. दूध संग्रह, भंडारण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि पशुपालकों को बेहतर दाम मिल सके. इसके साथ ही क्रेडिट लिंक सब्सिडी की शुरुआत होगी, जिससे पशुपालकों को लोन लेने में आसानी होगी.
पोल्ट्री, खेती और रोजगार की नई दिशा
पोल्ट्री क्षेत्र के विकास के लिए सरकार संगठन बनाएगी, जिससे छोटे पोल्ट्री किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मदद और बाजार से जोड़ा जा सके. खेती की उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हों, ताकि गांवों से शहरों की ओर पलायन कम हो सके.
पारंपरिक चिकित्सा और ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा
वित्त मंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च, ट्रेनिंग और जागरूकता को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा है. पशुपालन में प्राइवेट कॉलेज, अस्पताल, लैब और ब्रीडिंग सुविधाओं के लिए लोन-आधारित पूंजी सब्सिडी दी जाएगी, जिससे 20,000 से अधिक पेशेवरों को जोड़ा जाएगा. इसके अलावा भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी योजना है. इन पहलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है.