पशु नस्ल सुधार में नंदीशाला योजना का कमाल, बदल रही पशुपालन की तस्वीर और किसानों को हो रहा फायदा

मध्य प्रदेश सरकार पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के लिए ऐसी योजनाएं चला रही है, जिससे गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है. नस्ल सुधार और बेहतर प्रजनन व्यवस्था से दूध उत्पादन बढ़ रहा है. इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिल रहा है, जो लंबे समय से कम उत्पादन की समस्या से जूझ रहे थे.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 30 Jan, 2026 | 04:21 PM

Animal Breeding Scheme : गांवों में पशुपालन सिर्फ दूध का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की रोजी-रोटी की मजबूत नींव होता है. लेकिन कमजोर नस्ल, कम दूध और बढ़ता खर्च कई पशुपालकों की कमर तोड़ देता है. ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार की एक खास पहल अब गांवों में नई उम्मीद लेकर आई है. जिसका नाम समुन्नत पशु प्रजनन योजना और नंदीशाला योजना है. ये योजना न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि पशुपालकों की आमदनी को भी मजबूत बना रही है.

पशुपालकों के लिए क्यों खास है यह योजना

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार पशुधन सुधार  और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं का मकसद गांवों में पाले जाने वाले पशुओं की नस्ल को बेहतर बनाना है, ताकि कम संख्या में पशु पालकर भी ज्यादा दूध हासिल किया जा सके. लंबे समय से पारंपरिक तरीके से पशुपालन कर रहे किसानों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है, जो अब तक कम दूध उत्पादन की समस्या से जूझ रहे थे.

उन्नत नस्ल से बढ़ रहा दूध उत्पादन

इन योजनाओं के तहत प्रगतिशील पशुपालकों को उन्नत नस्ल  के प्रजनन योग्य सांड और पाड़ा अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इनके जरिए गांव की भैंसों और गायों की नस्ल में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. नस्ल सुधरने से पशु ज्यादा स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन में भी साफ बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. कई गांवों में इसका असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है.

नंदीशाला योजना से देसी नस्ल को नई पहचान

नंदीशाला योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर देसी नस्ल के सांड  उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य स्थानीय गायों की नस्ल को मजबूत बनाना है, ताकि देसी गायों से भी अच्छी गुणवत्ता और पर्याप्त मात्रा में दूध मिल सके. इसके साथ ही आवारा और अच्छी नस्ल वाले पशुओं का संरक्षण भी किया जा रहा है, जिससे उनका सही उपयोग हो सके और गांवों में पशुधन की संख्या और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो.

आसान प्रक्रिया, सीधा फायदा

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इन योजनाओं का लाभ लेना ज्यादा कठिन नहीं है. पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय, पशुपालन विभाग  कार्यालय पर जाकर इस  योजना की जानकारी लेकर आवेदन कर सकते हैं. जिन किसानों तक समय पर जानकारी पहुंच गई, उन्होंने इन योजनाओं का फायदा उठाकर अपनी आमदनी में सुधार किया है. सही जानकारी और समय पर आवेदन करने से कोई भी पशुपालक इस योजना से जुड़ सकता है.

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