समुद्र का बदला मिजाज, मछुआरों पर बढ़ा संकट! जलवायु बदलाव से घट रहे मछली पकड़ने के दिन

भारत के छोटे मछुआरों के लिए बदलता मौसम बड़ी चुनौती बन रहा है. बढ़ता तापमान, तेज चक्रवात, समुद्री तूफान और मछलियों की उपलब्धता में बदलाव उनकी कमाई प्रभावित कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, खराब समुद्री मौसम के कारण मछली पकड़ने के दिनों में भी लगातार कमी आ रही है.

नोएडा | Published: 6 Sep, 2026 | 11:11 AM

भारत में छोटे स्तर पर मछली पकड़ने वाले मछुआरों के सामने जलवायु परिवर्तन का खतरा लगातार बढ़ रहा है. बिजनेसलाइन के अनुसार, बढ़ता तापमान, ज्यादा तेज चक्रवात, समुद्री तूफान, खराब मौसम और मछलियों की उपलब्धता में बदलाव उनकी रोजी-रोटी पर असर डाल रहे हैं. मौसम और समुद्र की स्थिति में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण मछुआरों के लिए यह अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है कि वे कब सुरक्षित तरीके से समुद्र में जा पाएंगे. इस क्षेत्र को लेकर तैयार की गई एक डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में जलवायु जोखिमों के साथ-साथ बाजार, जमीन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी कई समस्याओं को भी सामने रखा गया है.

तेज चक्रवात और खराब समुद्र से घट रहे मछली पकड़ने के दिन

बिजनेसलाइन के रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन  का असर अब छोटे मछुआरों के रोजमर्रा के काम में साफ दिखाई देने लगा है. समुद्र में तेज चक्रवात और तूफानी लहरों की घटनाएं बढ़ रही हैं. इसके साथ ही खराब समुद्री मौसम वाले दिनों की संख्या भी बढ़ रही है. समुद्र की स्थिति खराब होने पर मछुआरों को कई बार समुद्र में जाने से बचना पड़ता है. इससे उनके मछली पकड़ने के दिनों की संख्या कम होती है और सीधे उनकी कमाई प्रभावित होती है. मौसम में अचानक बदलाव छोटे मछुआरों के लिए आर्थिक जोखिम को और बढ़ा रहा है.

मछलियों की उपलब्धता और मानसून में भी बदलाव

रिपोर्ट में बताया गया है कि तापमान बढ़ने के साथ मछलियों की उपलब्धता  और उनके मिलने वाले स्थानों में बदलाव देखने को मिल रहा है. इसका असर मछुआरों की पकड़ और आय पर पड़ सकता है. इसके अलावा मानसून और मछली पकड़ने के मौसम में बदलाव भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है. जिन समयों में मछुआरे पहले आसानी से समुद्र में जाकर मछली पकड़ते थे, अब मौसम की अनिश्चितता के कारण उन गतिविधियों की योजना बनाना मुश्किल हो रहा है.

सिर्फ जलवायु नहीं, कई दूसरी समस्याएं भी

छोटे मछुआरों की परेशानियां  केवल मौसम तक सीमित नहीं हैं. रिपोर्ट में तटीय क्षेत्रों में जमीन और संसाधनों पर अधिकार की अनिश्चितता को भी बड़ी समस्या बताया गया है. इसके अलावा मछुआरों की बाजार तक सीमित पहुंच के कारण उन्हें अपनी पकड़ी गई मछली का बेहतर दाम मिलने में भी परेशानी हो सकती है. रिपोर्ट में महिलाओं की भागीदारी और उनके लिए समान अवसरों की कमी तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक असमान पहुंच को भी क्षेत्र की कमजोरियों में शामिल किया गया है. इन समस्याओं का असर खासकर छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरा परिवारों पर पड़ता है.

छोटे मछुआरों के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना की तैयारी

यह डायग्नोस्टिक रिपोर्ट प्रस्तावित NPOA-SSF के लिए तैयार की गई है. बिजनेसलाइन के अनुसार, रिपोर्ट को BOBP-IGO ने राष्ट्रीय विशेषज्ञों  के सहयोग से तैयार किया है. इसमें संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की तकनीकी मदद भी ली गई है. यह रिपोर्ट भारत में FAO के मार्गदर्शन में चल रही NPOA-SSF प्रक्रिया के शुरुआती चरण का हिस्सा है. इसका उद्देश्य छोटे स्तर के मछुआरों की प्रमुख समस्याओं और कमजोरियों को पहचानना है, ताकि भविष्य में उनके लिए बेहतर नीतियां और सहायता व्यवस्था तैयार की जा सके. जलवायु जोखिमों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए छोटे मछुआरों की आय, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना अब बड़ी प्राथमिकता बनता जा रहा है.

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