जलवायु परिवर्तन से मवेशियों की प्रजनन क्षमता प्रभावित, समय से पहले बछड़ों को दे रहीं जन्म

देश में बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन का असर डेयरी क्षेत्र पर साफ दिखने लगा है. हीट स्ट्रेस के कारण गायों का दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है, जबकि किसानों की लागत बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनौती छोटे डेयरी किसानों के लिए अधिक गंभीर बनती जा रही है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 Jun, 2026 | 08:47 AM

Animal Husbandry: देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब डेयरी पशुओं पर भी दिखाई देने लगा है. विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी गाय-भैंसों के स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है, जिससे समय से पहले बछड़ों के जन्म जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी से गर्भपात के मामले बढ़ सकते हैं और दूध में वसा (फैट) की मात्रा भी कम हो जाती है. इससे किसानों की आय प्रभावित होती है, क्योंकि उन्हें दूध में मौजूद फैट और अन्य ठोस तत्वों के आधार पर भुगतान मिलता है. इस चुनौती से निपटने के लिए किसानों को विशेष पशु आहार, अतिरिक्त पानी और बिजली पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के पास रहने वाले डेयरी किसान नीरज भारद्वाज का कहना है कि पिछले साल 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली भीषण गर्मी के दौरान उनकी एक गाय ने कई महीने पहले ही बछड़े को जन्म दे दिया. नवजात बछड़ा बहुत छोटा था और उसके शरीर पर बाल भी बहुत कम थे. लोगों को लगा कि वह जीवित नहीं रहेगा, लेकिन नीरज ने उसे बोतल से दूध पिलाकर उसकी देखभाल की, जिससे वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो गया.

देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा

वहीं, वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार बढ़ रही गर्मी का परिणाम हैं. भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और यहां अधिकांश दूध छोटे किसानों द्वारा 2 से 5 पशुओं वाले डेयरी फार्मों से उत्पादन किया जाता है. भारत का डेयरी क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 5 फीसदी योगदान देता है और 8 करोड़ से अधिक किसानों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है. बढ़ती आबादी और आय के कारण दूध और डेयरी उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक देश में डेयरी उत्पादों की मांग लगभग दोगुनी हो सकती है.

बढ़ती गर्मी डेयरी किसानों के लिए नई चुनौती

हालांकि, बढ़ती गर्मी डेयरी किसानों के लिए नई चुनौती बन रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक तापमान के दौरान गायें कम चारा खाती हैं, कम दूध देती हैं और उनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है. इससे जीवित बछड़ों के जन्म की संख्या घट सकती है. वहीं किसानों को पशुओं को ठंडा रखने और उनकी सेहत बनाए रखने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है. डेयरी किसान नीरज भारद्वाज का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान दूध उत्पादन में करीब 30 फीसदी तक गिरावट आ जाती है. दूसरी ओर, कूलिंग और देखभाल पर बढ़ते खर्च से उनकी आय पर लगातार दबाव बढ़ रहा है.

दुग्ध उत्पादन लगातार बढ़ा है

इसके बावजूद भारत का दुग्ध उत्पादन  लगातार बढ़ा है और यह देश की कृषि क्षेत्र की बड़ी सफलताओं में गिना जाता है. उत्पादकता बढ़ाने और शहरी मांग को पूरा करने के लिए वर्षों से चलाए गए नस्ल सुधार और क्रॉसब्रीडिंग कार्यक्रमों का इसमें अहम योगदान रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का दूध उत्पादन रिकॉर्ड 23.9 करोड़ टन तक पहुंच गया, जो पिछले एक दशक में लगभग 64 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है.

डेयरी मॉडल की कमजोरियां उजागर

विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और किसानों का कहना है कि बढ़ती गर्मी भारत के डेयरी मॉडल की कमजोरियों को उजागर कर रही है. राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के वैज्ञानिकों के अनुसार, हीट स्ट्रेस के कारण गायें कम चारा खाती हैं और उनकी ऊर्जा दूध उत्पादन तथा प्रजनन की बजाय शरीर का तापमान नियंत्रित करने में खर्च होती है. अधिक दूध देने वाली उन्नत नस्ल की गायें इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं, क्योंकि उनके शरीर में पहले से ही अधिक गर्मी पैदा होती है.

गर्मी से निपटने के लिए तेजी से बदलाव किए गए

वहीं, पशुधन क्षेत्र में जलवायु अनुकूलन पर काम करने वाले डेयरी उद्यमी  और सलाहकार पंकज नवानी का कहना है कि पंजाब जैसे राज्यों के बड़े और संगठित डेयरी फार्मों ने बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए तेजी से बदलाव किए हैं. वे डेयरी को एक व्यवसाय की तरह चलाते हैं और पशुओं के लिए कूलिंग सिस्टम, बेहतर वेंटिलेशन और संतुलित आहार प्रबंधन पर निवेश कर रहे हैं. हालांकि, कुछ ही पशुओं और सीमित पूंजी वाले छोटे डेयरी किसानों के लिए इस तरह का निवेश करना आसान नहीं है. नवानी का मानना है कि दो से चार गायों वाले छोटे घरेलू डेयरी फार्म आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे कम हो सकते हैं, क्योंकि बढ़ती लागत और जलवायु संबंधी चुनौतियां उनके लिए बड़ा दबाव बन रही हैं.

 

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Published: 3 Jun, 2026 | 08:44 AM

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