एक ही शेड में गाय, भैंस और बकरी पालन से बढ़ी किसानों की कमाई, कम खर्च में मिला दोगुना फायदा

अब किसान कम खर्च में ज्यादा कमाई के लिए एकीकृत पशुपालन मॉडल अपना रहे हैं. इसमें एक ही शेड में गाय, भैंस और बकरी पालन किया जाता है. इससे दूध से रोजाना आय मिलती है और बकरी के बच्चों की बिक्री से अतिरिक्त कमाई होती है, जिससे किसानों की कुल आय बढ़ने लगती है.

नोएडा | Updated On: 9 Mar, 2026 | 04:45 PM

Integrated Farming: आज के समय में खेती के साथ पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन चुका है. लेकिन कई बार किसान सोचते हैं कि अलग-अलग पशु पालने के लिए ज्यादा जगह, ज्यादा खर्च और ज्यादा मेहनत लगेगी. इसी सोच के कारण कई लोग नए प्रयोग करने से बचते हैं. लेकिन अब एक ऐसा तरीका सामने आ रहा है, जिससे किसान बिना ज्यादा खर्च किए अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं. इस मॉडल में गाय, भैंस और बकरी तीनों को एक ही शेड में पालकर अच्छी आय हासिल की जा सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही तरीके से व्यवस्था की जाए तो एक ही ढांचे में अलग-अलग पशुओं का पालन करना पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद हो सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार एकीकृत पशुपालन मॉडल छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है. इससे कम लागत में कई स्रोतों से आय मिलती है और जोखिम भी कम हो जाता है.

एक ही शेड में अलग-अलग पेन बनाना आसान

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए नया शेड बनाने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर किसान के पास पहले से गाय या भैंस  के लिए शेड है तो उसी में थोड़ी सी व्यवस्था करके बकरियों के लिए अलग पेन बनाया जा सकता है. पशु चिकित्सकों के अनुसार शेड के अंदर लकड़ी, लोहे की जाली या बांस की मदद से छोटा सा अलग हिस्सा तैयार किया जा सकता है. इससे बकरियां सुरक्षित रहती हैं और अन्य पशुओं से भी दूरी बनी रहती है. इस तरह एक ही जगह में अलग-अलग पशुओं का पालन करना आसान हो जाता है. इससे किसानों को जगह की बचत होती है और नया निर्माण कराने का खर्च भी नहीं करना पड़ता.

एकीकृत पशुपालन मॉडल से किसानों को मिल रहा ज्यादा मुनाफा.

दूध और बकरी से दोहरी कमाई

जब किसान गाय और भैंस पालते हैं तो उन्हें रोजाना दूध  से आय मिलती है. दूध की बिक्री से घर का नियमित खर्च आसानी से चल सकता है. अगर इसके साथ बकरी पालन भी जोड़ दिया जाए तो आय का एक और मजबूत स्रोत बन जाता है. बकरी साल में दो से तीन बार बच्चे देती है और हर बार एक से अधिक बच्चे भी हो सकते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार बकरी के बच्चे कुछ महीनों में ही अच्छे दाम पर बिक जाते हैं. इससे किसानों को समय-समय पर अतिरिक्त आय मिलती रहती है. इस तरह किसान को रोजाना दूध से कमाई और बीच-बीच में बकरी बिक्री से अतिरिक्त लाभ मिलता है.

चारा और देखभाल में भी होती है बचत

इस मॉडल का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें चारा और श्रम की बचत होती है. गाय और भैंस के लिए जो हरा चारा और भूसा लाया जाता है, उसी में से बकरियों को भी दिया जा सकता है. इससे अलग से चारा खरीदने की जरूरत कम पड़ती है. साथ ही पशुओं की देखभाल  करने वाला व्यक्ति एक ही समय में सभी पशुओं का ध्यान रख सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जब पशुओं को पौष्टिक चारा मिलता है और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है, तो उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है. इससे बीमारियों का खतरा कम होता है और उत्पादन भी बेहतर रहता है.

छोटे किसानों के लिए बड़ा मौका

ग्रामीण क्षेत्रों  में कई किसानों के पास सीमित जमीन और संसाधन होते हैं. ऐसे में एकीकृत पशुपालन मॉडल उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार अगर किसान एक ही शेड में अलग-अलग पशुओं का सही तरीके से प्रबंधन करें तो कम लागत में अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है. इसके साथ ही सरकार भी डेयरी और बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं के तहत पशु खरीद, शेड निर्माण और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए अनुदान और सब्सिडी भी दी जाती है.

अगर किसान इन योजनाओं का लाभ लेकर एकीकृत पशुपालन अपनाते हैं, तो उनकी आय में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है. आज कई किसान समझ चुके हैं कि केवल खेती पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. अगर खेती के साथ पशुपालन को सही तरीके से जोड़ा जाए तो कम जमीन और कम खर्च में भी अच्छी कमाई की जा सकती है. एक ही शेड में गाय, भैंस और बकरी पालन का यह मॉडल किसानों के लिए कमाई का नया और आसान रास्ता बनता जा रहा है.

Published: 9 Mar, 2026 | 05:45 PM

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