व्हाट्सएप पर डील और करोड़ों का लेन-देन.. बिहार में वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 तस्कर रडार पर!
बिहार के झंझारपुर में तेंदुए और हिरण की खाल की बरामदगी ने वन्यजीव तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. इस काले कारोबार में मुजफ्फरपुर और मोतिहारी के सफेदपोशों के नाम सामने आए हैं, जहाँ 3.7 करोड़ रुपये की डील होनी थी. पुलिस और वन विभाग अब इस गिरोह के मास्टरमाइंड्स की तलाश में छापेमारी कर रही है.
Wildlife Smuggling Bihar : बिहार के शांत दिखने वाले इलाकों के पीछे वन्यजीवों की तस्करी का एक खौफनाक सिंडिकेट काम कर रहा है. हाल ही में मधुबनी के झंझारपुर में तेंदुए और हिरण की खाल की बरामदगी ने इस रैकेट की जड़ों को बेनकाब कर दिया है.
यह सिर्फ जानवरों की खाल का सौदा नहीं था, बल्कि करोड़ों रुपये के लेन-देन वाली एक ऐसी डेथ डील थी, जिसके तार बिहार के बड़े शहरों-मुजफ्फरपुर और मोतिहारी-से जुड़े हुए हैं. तस्करों की योजना पलामू टाइगर रिजर्व से लाए गए इन अंगों को ऊंची कीमतों पर ठिकाने लगाने की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के जाल ने उनकी सारी प्लानिंग पर पानी फेर दिया.
कहां जाना था पैसा?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार तस्करों से हुई पूछताछ में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. झंझारपुर में जब्त हुई खाल के बदले करीब 2.2 करोड़ रुपये मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर निवासी सुधाकर कुमार को पहुंचाए जाने थे. वहीं, 1.5 करोड़ रुपये की एक बड़ी रकम मोतिहारी में एक नामी शोरूम के मैनेजर को मिलनी थी. जांच अधिकारी इस बात से हैरान हैं कि कैसे गहनों के व्यापार और रिहायशी इलाकों के पीछे करोड़ों की तस्करी का यह सिंडिकेट इतनी सफाई से फल-फूल रहा था.
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कैसे बिछाया गया मौत का जाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग को आशंका है कि ये खालें पलामू टाइगर रिजर्व के संरक्षित जीवों की हैं. इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और कोलकाता की विशेष टीम ने झंझारपुर में डेरा डाला था. रेंजर अर्जुन कुमार गुप्ता के मुताबिक, पलामू के शूटरों और तस्करों से मिली खुफिया जानकारी के बाद कई दिनों तक निगरानी रखी गई. पकड़े गए तस्कर धीरज, चंदन और अजय झा ने बताया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे से खेल रहा था. गिरफ्तार लोग तो महज प्यादे थे, जिन्हें कुछ हजार से लेकर पांच लाख रुपये तक का लालच दिया गया था.
व्हाट्सएप पर डील और खाल की नुमाइश
आज के दौर में तस्करी का तरीका भी हाईटेक हो गया है. तस्करों ने कबूल किया कि तेंदुए की खाल और बाघ के नाखूनों की डील पहले मोबाइल पर हुई. व्हाट्सएप के जरिए इन खालों की तस्वीरें एक शहर से दूसरे शहर भेजी गईं. जब खरीदार और तस्कर के बीच कीमत तय हो गई, तब वे माल की डिलीवरी के लिए झंझारपुर में इकट्ठा हुए. मुजफ्फरपुर के कई नाम इस नेटवर्क के डिजिटल दलाल बनकर उभरे हैं, जो तस्वीरों के जरिए करोड़ों के सौदे पक्के करवा रहे थे.
जांच के घेरे में बड़े नाम
वन विभाग और पुलिस की रडार पर अब मुजफ्फरपुर के तीन बड़े तस्करों समेत कुल पांच मुख्य सरगना हैं. जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बाघ के नाखूनों की डील भी पूरी हो चुकी है या वह कहीं और सप्लाई किए गए. जिस तरह से एक ज्वेलरी शोरूम के मैनेजर का नाम सामने आया है, उससे यह साफ है कि तस्करी का यह नेटवर्क समाज के सफेदपोश लोगों तक भी पहुंच चुका है. अधिकारियों का कहना है कि यह तो अभी सिर्फ शुरुआत है, आने वाले दिनों में और भी बड़े चेहरों से नकाब उतर सकता है.