मॉनसून से पहले पशुओं की कराएं डीवार्मिंग, नहीं तो घटेगा दूध उत्पादन.. बीमारियों का भी खतरा

मॉनसून के मौसम में पशुओं में संक्रमण और पेट संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर की गई एक जरूरी प्रक्रिया पशुओं को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है. इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहती है और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Jun, 2026 | 02:01 PM

Cattle Deworming: मॉनसून का मौसम जहां किसानों के लिए खेती की नई उम्मीदें लेकर आता है, वहीं पशुपालकों के लिए ये पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने का समय भी होता है. बारिश के दौरान खेतों और चरागाहों में नमी बढ़ने से कई प्रकार के बैक्टीरिया, परजीवी और हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं. जब पशु दूषित घास या चारा खाते हैं तो ये उनके शरीर में पहुंचकर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं. इसलिए बरसात शुरू होने से पहले पशुओं की डीवार्मिंग कराना बेहद जरूरी माना जाता है.

पेट के कीड़े बन सकते हैं कई समस्याओं की वजह

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, पशुओं के पेट में विकसित होने वाले आंतरिक कीड़े उनकी सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं. इनकी वजह से पशुओं की भूख कम  हो जाती है, वजन घटने लगता है और शरीर कमजोर पड़ने लगता है. इसके अलावा दस्त, पाचन संबंधी समस्याएं और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी परेशानियां भी देखने को मिलती हैं. यदि समय रहते इन कीड़ों का नियंत्रण नहीं किया गया तो पशुओं की कार्यक्षमता और उत्पादन क्षमता दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

दूध उत्पादन पर भी पड़ता है सीधा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि पेट में कीड़ों की मौजूदगी  का सबसे बड़ा असर दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है. शरीर में पोषक तत्वों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता, जिससे पशु कमजोर होने लगते हैं और दूध की मात्रा घट सकती है. कई बार पशु पर्याप्त चारा खाने के बावजूद अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पाते. ऐसे में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. नियमित डीवार्मिंग पशुओं के पाचन तंत्र को स्वस्थ रखती है, जिससे वे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाते हैं और उत्पादन क्षमता बनी रहती है.

हर चार महीने में कराएं डीवार्मिंग

कुंवर घनश्याम के अनुसार, मानसून शुरू होने से पहले  पशुओं को डीवार्मिंग की दवा देना एक प्रभावी बचाव उपाय है. बाजार में इसके लिए कई प्रकार की दवाएं टैबलेट और लिक्विड रूप में उपलब्ध हैं, लेकिन किसी भी दवा का उपयोग पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. उन्होंने बताया कि केवल मानसून से पहले ही नहीं, बल्कि पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर चार महीने के अंतराल पर नियमित डीवार्मिंग कराना फायदेमंद होता है. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, विकास बेहतर होता है और दूध उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. नियमित देखभाल और समय पर उपचार से पशुपालक अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकते हैं और बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

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