गायब होते गिद्ध फिर लौटे जंगलों में, मध्यप्रदेश में संरक्षण से बढ़ी हजारों गिद्धों की आबादी
मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो पर्यावरण के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है. कई जिलों में हुई गणना में गिद्धों की संख्या पहले से ज्यादा मिली है. सरकार और वन विभाग के प्रयासों से गिद्ध संरक्षण मजबूत हुआ है और जंगलों में उनकी वापसी दिखाई दे रही है.
Vulture Conservation: कभी तेजी से घट रही गिद्धों की संख्या अब फिर बढ़ने लगी है. संरक्षण प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. हाल ही में कई जिलों में हुई गिद्ध गणना और संरक्षण कार्यक्रमों से यह साबित हुआ है कि मध्यप्रदेश फिर से गिद्धों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्धों की बढ़ती संख्या पर्यावरण के स्वस्थ होने का संकेत है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने हलाली डैम क्षेत्र में 5 दुर्लभ गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा. इसके साथ ही मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी गिद्ध राज्य बताया गया. राज्य में हजारों गिद्ध पाए जा रहे हैं और उनकी निगरानी भी की जा रही है.
हलाली डैम से शुरू हुआ नया अभियान
हलाली डैम क्षेत्र में छोड़े गए पांच गिद्धों में चार भारतीय गिद्ध और एक सिनेरियस गिद्ध शामिल हैं. इन गिद्धों को पहले भोपाल के संरक्षण केंद्र में रखा गया था, जहां विशेषज्ञों ने उनकी देखभाल की. इसके बाद उन्हें जंगल में छोड़ा गया. इन सभी गिद्धों पर जीपीएस मशीन लगाई गई है, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी. इससे यह पता चलेगा कि वे कहां जाते हैं और किन जगहों पर रहते हैं. यह जानकारी भविष्य में गिद्ध संरक्षण के लिए बहुत काम आएगी. वन विभाग और कई संस्थाएं मिलकर इस अभियान को चला रही हैं ताकि गिद्धों की संख्या लगातार बढ़ती रहे.
संरक्षण से बढ़ रही गिद्धों की संख्या लगातार.
अलग-अलग जिलों में दिखा अच्छा परिणाम
मध्यप्रदेश के कई जिलों में गिद्धों की संख्या बढ़ने की खबर सामने आई है. कटनी वनमंडल में हुई गणना में 268 देशी गिद्ध, 20 सफेद गिद्ध, 2 राज गिद्ध और 1 चमर गिद्ध पाए गए. इस सर्वे में कर्मचारियों ने ड्रोन, कैमरा और दूरबीन की मदद से गिद्धों की गिनती की. मंदसौर जिले के गांधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में भी गिद्धों की संख्या बढ़ना अच्छा संकेत माना जा रहा है. अधिकारी मानते हैं कि यह संरक्षण प्रयासों का परिणाम है. जबलपुर जिले में भी गिद्धों की संख्या बढ़कर 92 हो गई है, जो पिछले साल से करीब 40 प्रतिशत ज्यादा है. इससे पता चलता है कि पर्यावरण धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है.
क्यों जरूरी हैं गिद्ध
गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है. ये मृत जानवरों को खाकर आसपास का वातावरण साफ रखते हैं और बीमारियों को फैलने से रोकते हैं. अगर गिद्ध नहीं होंगे तो गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. कुछ साल पहले दर्द की दवा डिक्लोफेनाक के इस्तेमाल से गिद्धों की संख्या तेजी से कम हो गई थी. इसके अलावा जंगल कम होने और भोजन की कमी से भी इन पर असर पड़ा. अब वन विभाग सुरक्षित भोजन स्थल बना रहा है और लोगों को जागरूक भी कर रहा है ताकि गिद्धों को बचाया जा सके.
मध्य प्रदेश में हजारों गिद्ध पाए जा रहे हैं.
संरक्षण से लौट रही उम्मीद
गिद्धों की नई गणना में यह संकेत मिला है कि राज्य में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. मोबाइल ऐप और नई तकनीक की मदद से गिनती ज्यादा सही तरीके से की जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह प्रयास चलते रहे तो आने वाले समय में गिद्धों की संख्या और बढ़ेगी. इससे पर्यावरण मजबूत होगा और प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा. मध्यप्रदेश में गिद्धों की वापसी को प्रकृति के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है और यह दिखाता है कि सही प्रयासों से लुप्त होती प्रजातियों को बचाया जा सकता है.