सर्दियों में मछलियों को लगती है ठंड या नहीं? गलतफहमी दूर करें, वरना जेब पर पड़ेगा असर
सर्दियों में मछली पालकों के मन में कई सवाल उठते हैं कि क्या ठंड से मछलियां बीमार हो सकती हैं. सही तापमान, तालाब की गहराई और पानी की देखभाल से मछलियों को सुरक्षित रखा जा सकता है. थोड़ी समझदारी से सर्दियों में भी अच्छा उत्पादन और मुनाफा संभव है.
Winter Fish Care : जैसे ही सर्दियों की ठंडी हवाएं चलने लगती हैं, मछली पालकों की चिंता भी बढ़ जाती है. तालाब का पानी ठंडा होते ही कई लोग डर जाते हैं कि कहीं मछलियां बीमार न पड़ जाएं या मर न जाएं. कुछ लोग इसे सिर्फ अफवाह मानते हैं, तो कुछ इसे गंभीर समस्या समझ लेते हैं. सर्दियों में मछलियों पर ठंड का असर पड़ता है या नहीं, यह पूरी तरह सही जानकारी और देखभाल पर निर्भर करता है.
क्या मछलियों को सच में ठंड लगती है?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह बात पूरी तरह गलत नहीं है कि सर्दियों में मछलियों पर ठंड का असर पड़ता है. मछलियां कोल्ड ब्लडेड जीव होती हैं, यानी उनके शरीर का तापमान पानी के तापमान पर ही निर्भर करता है. जैसे-जैसे पानी ठंडा होता है, मछलियों की गतिविधियां भी धीमी होने लगती हैं. उनका खाना कम हो जाता है और ग्रोथ रुकने लगती है. हालांकि, यह असर हर मछली पर एक जैसा नहीं होता.
हर मछली पर ठंड का असर अलग-अलग
कुछ मछलियां ठंडे पानी में रहने की आदी होती हैं, जिन्हें कोल्ड वाटर फिश कहा जाता है. इन पर सर्दियों का ज्यादा असर नहीं पड़ता. वहीं, भारत में आमतौर पर पाली जाने वाली रोहू, कतला और मृगल जैसी मछलियां वार्म वाटर फिश की श्रेणी में आती हैं. इन मछलियों पर सर्दियों का असर जल्दी दिखता है और अगर सही देखभाल न हो, तो नुकसान की आशंका बढ़ जाती है.
सर्दियों में तालाब और पानी की देखभाल जरूरी
सर्दियों में तालाब की गहराई बहुत अहम हो जाती है. तालाब इतना गहरा होना चाहिए कि ऊपर का पानी ठंडा होने पर मछलियां नीचे जाकर खुद को सुरक्षित रख सकें. इसके साथ ही पानी का स्तर बनाए रखना भी जरूरी है. सर्दियों में रोजाना करीब 10 से 15 प्रतिशत पानी बदलना फायदेमंद माना जाता है. अगर जमीन के अंदर का पानी इस्तेमाल किया जाए, जिसका तापमान सामान्य रहता है, तो मछलियों को ठंड से राहत मिलती है.
तापमान में अचानक बदलाव से बचें
वार्म वाटर फिश के लिए आदर्श तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस माना जाता है. लेकिन ठंडे तालाब में अचानक गर्म पानी डालना खतरनाक हो सकता है. इससे मछलियों को टेम्परेचर शॉक लग सकता है, जिससे वे बीमार पड़ सकती हैं या मर भी सकती हैं. बड़े तालाबों में यह खतरा कम रहता है, क्योंकि वहां पानी का संतुलन बना रहता है. वहीं टैंक कल्चर में तापमान नियंत्रित रखना आसान होता है, जिससे मछलियों की सेहत और उत्पादन दोनों बेहतर रहते हैं.