केरल में दूध उत्पादन क्यों बन गया घाटे का सौदा? प्रियंका गांधी ने सरकार से की ये बड़ी मांग

प्रियंका गांधी ने पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री को लिखे पत्र में साफ तौर पर कहा है कि चारे की बढ़ती कीमतें डेयरी किसानों की कमर तोड़ रही हैं. उनके मुताबिक, कुछ अध्ययनों में यह सामने आया है कि दूध उत्पादन की कुल लागत का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल पशु आहार पर ही खर्च हो जाता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 23 Jan, 2026 | 07:36 AM

Kerala dairy farmers: केरल के डेयरी किसान इन दिनों गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहे हैं. दूध उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को मिलने वाला दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाया है. इसी मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल सरकार से चारा सब्सिडी की सीमा बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा सब्सिडी न केवल कम है, बल्कि किसानों की असली जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है.

चारे की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई मुश्किल

वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी ने पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री को लिखे पत्र में साफ तौर पर कहा है कि चारे की बढ़ती कीमतें डेयरी किसानों की कमर तोड़ रही हैं. उनके मुताबिक, कुछ अध्ययनों में यह सामने आया है कि दूध उत्पादन की कुल लागत का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल पशु आहार पर ही खर्च हो जाता है. ऐसे में अगर चारा महंगा होगा, तो दूध उत्पादन अपने आप घाटे का सौदा बन जाता है.

चारा उत्पादन में भारी कमी

प्रियंका गांधी ने अपने पत्र में यह भी बताया कि केरल, खासकर वायनाड जिले में चारा उत्पादन बेहद सीमित है. वायनाड में फिलहाल सिर्फ करीब 1,800 हेक्टेयर भूमि पर ही चारे की खेती हो रही है, जबकि स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कम से कम 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में चारा उत्पादन जरूरी है. इस कमी के चलते किसानों को पड़ोसी राज्यों से चारा मंगवाना पड़ता है, जो महंगे दामों पर मिलता है और कई बार आपूर्ति भी बाधित हो जाती है.

महंगा उत्पादन, लेकिन दूध का दाम वही पुराना

डेयरी किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जहां दूध उत्पादन की लागत 50 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुकी है, वहीं उन्हें दूध का खरीद मूल्य अब भी 47 से 48 रुपये प्रति लीटर के आसपास ही मिल रहा है. इस अंतर की भरपाई किसान अपनी जेब से कर रहे हैं. नतीजा यह है कि धीरे-धीरे कर्ज बढ़ रहा है और कई किसान डेयरी व्यवसाय छोड़ने की कगार पर पहुंच गए हैं.

जंगल और जंगली जानवरों का खतरा

वायनाड जैसे इलाकों में एक और बड़ी समस्या जंगली जानवरों की है. प्रियंका गांधी ने पत्र में उल्लेख किया कि चारा इकट्ठा करने के दौरान किसानों को हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है. यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि किसानों की जान से जुड़ा मामला भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

मौजूदा सब्सिडी क्यों पड़ रही कम

फिलहाल केरल में डेयरी किसानों को हरे चारे पर 3 रुपये प्रति किलो और सूखे चारे पर 4 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दी जाती है. इसके अलावा, एक किसान को अधिकतम 5,000 रुपये तक की ही सब्सिडी मिल पाती है, जबकि डेयरी सहकारी समितियों के लिए यह सीमा एक लाख रुपये तय है. प्रियंका गांधी का कहना है कि यह सहायता स्वागत योग्य तो है, लेकिन मौजूदा हालात में यह बिल्कुल नाकाफी है. उनका आग्रह है कि सब्सिडी की राशि और उसकी सीमा दोनों बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि किसानों को वास्तविक राहत मिल सके.

जीएसटी और अकाउंटिंग का अतिरिक्त बोझ

प्रियंका गांधी ने यह मुद्दा भी उठाया कि डेयरी किसानों और सहकारी समितियों पर जीएसटी अनुपालन और चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवाओं का खर्च भी भारी पड़ रहा है. छोटे किसानों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं है. अगर सरकार इस दिशा में भी कोई सहायता व्यवस्था करे, तो इससे किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है.

कर्ज में डूबते किसान और सरकार की जिम्मेदारी

अपने पत्र के अंत में प्रियंका गांधी ने कहा कि केरल में लाखों डेयरी किसान कर्ज और लगातार हो रहे नुकसान से जूझ रहे हैं. यह क्षेत्र ग्रामीण इलाकों के सबसे कमजोर समुदायों की आजीविका का आधार है. ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों को केवल नुकसान से उबरने में ही नहीं, बल्कि भविष्य में प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करे.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि डेयरी किसानों के हित में उठाए जाने वाले हर सकारात्मक कदम में उनका पूरा समर्थन रहेगा. अब देखना यह है कि केरल सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या चारा सब्सिडी बढ़ाकर डेयरी किसानों को कुछ राहत मिल पाती है या नहीं.

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