जई की नई किस्म विकसित, अब पशु आहार की किल्लत खत्म.. प्रति एकड़ 90 क्विंटल होगा हरा चरा

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ने देश की पहली स्वदेशी उच्च गुणवत्ता वाली ओट्स किस्म OL16 विकसित की है. यह किस्म चारे और पौष्टिक अनाज दोनों के लिए उपयोगी है. अधिक बीटा-ग्लूकान के कारण यह किसानों और उपभोक्ताओं के लिए एक सेहतमंद व लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है.

Kisan India
नोएडा | Published: 7 Jan, 2026 | 06:00 AM

Agriculture News: पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) ने देश की पहली उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी जई (ओट्स) किस्म विकसित की है. यूनिवर्सिटी अधिकारियों के अनुसार इस किस्म का नाम OL16 है, जो किसानों को चारे और पौष्टिक अनाज दोनों के लिए एक बेहतर देसी विकल्प देती है. अभी तक भारत में उपलब्ध अधिकांश ओट्स की किस्में आयातित हैं. केंद्र सरकार ने भी इस किस्म के 36 क्विंटल ब्रीडर बीज का ऑर्डर दिया है.

पीएयू के प्लांट ब्रीडिंग एंड जेनेटिक्स विभाग के मुताबिक, OL16 ने खेतों में शानदार प्रदर्शन किया है. बुवाई के 65 से 70 दिन बाद काटने पर यह किस्म प्रति एकड़ औसतन 90 क्विंटल हरा चारा देती है. यदि फसल को पूरी तरह पकने दिया जाए तो यह मध्यम ऊंचाई के पौधों के साथ अच्छी गुणवत्ता का ओट्स अनाज देती है, जिसकी औसत उपज 7.6 क्विंटल प्रति एकड़ है. प्रमुख ब्रीडर राहुल कपूर ने बताया कि इसमें 5.5 प्रतिशत बीटा-ग्लूकान पाया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की ओट्स गुणवत्ता के लिए बेहद जरूरी माना जाता है.

ओएल सीरीज की ओट्स किस्मों पर काम कर रहा है

बीटा-ग्लूकान खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, जिससे OL16 उपभोक्ताओं के लिए भी एक ज्यादा सेहतमंद विकल्प बन जाती है. पीएयू पिछले एक दशक से ओएल सीरीज की ओट्स किस्मों पर काम कर रहा है और इसके बाद OL17 जैसी अन्य किस्में भी विकसित की गई हैं. हालांकि, OL16 अपनी अधिक बीटा-ग्लूकान मात्रा और चारा व अनाज- दोनों के फायदे के कारण सबसे खास मानी जा रही है.

गुणवत्तापूर्ण चारा और पौष्टिक अनाज मिलेगा

पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने OL16 को ‘गेम-चेंजर किस्म’  बताया. उन्होंने कहा कि यह किस्म पंजाब ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है. गुणवत्तापूर्ण चारा और पौष्टिक अनाज- दोनों उपलब्ध कराने वाली OL16, किसानों को गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों का बेहतर विकल्प दे सकती है और खेती के तरीकों में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है.

9 उन्नत किस्में विकसित की गईं

वहीं, पिछले साल बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने 9 उन्नत किस्मों को विकसित करने में कामयाबी पाई थी. इन किस्मों को प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन देने के लिए वैज्ञानिक तौर पर विकसित किया गया था. खास बात यह है कि आईसीएआर ने भी इन किस्मों की सराहना की थी. अब राज्य के किसानों के लिए खेती और अधिक लाभकारी होने वाली है.विश्वविद्यालय की ओर से गेहूं, दलहन और सरसों फसल  की 9 उन्नत किस्मों को विकसित किया गया था. यह किस्में न सिर्फ तेजी से बदलते मौसम को झेलने में सक्षम हैं, बल्कि इनमें कीटों का असर भी काफी कम देखा गया है.

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Published: 7 Jan, 2026 | 06:00 AM
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