बिच्छू… नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. गांव हो या शहर, बिच्छू दिख जाए तो सबसे पहले मन में डर आता है कि कहीं डंक न मार दे. बचपन से हमें यही सिखाया गया कि बिच्छू खतरनाक होता है और उससे दूर रहना ही बेहतर है. लेकिन वक्त के साथ विज्ञान ने इस छोटे से जीव को बिल्कुल नए नजरिए से देखना शुरू किया. आज वही बिच्छू, जिससे लोग डरते थे, दुनिया भर में उम्मीद, इलाज और करोड़ों की कमाई का जरिया बन चुका है.
यह सुनकर अजीब लग सकता है, लेकिन सच यही है कि बिच्छू का जहर अब सिर्फ जहर नहीं रहा. वह दवाइयों, मेडिकल रिसर्च और यहां तक कि ब्यूटी इंडस्ट्री में भी काम आ रहा है.
आखिर क्या खास है बिच्छू के जहर में
बिच्छू का जहर जहरीला जरूर होता है, लेकिन इसी जहर में छिपे हैं कुछ ऐसे तत्व, जो वैज्ञानिकों के लिए बेहद कीमती हैं. इस जहर में मौजूद खास प्रोटीन और टॉक्सिन इंसानी शरीर के कुछ हिस्सों पर बहुत सटीक तरीके से असर करते हैं. यही वजह है कि मेडिकल साइंस में इसे एक खजाने की तरह देखा जा रहा है.
कई रिसर्च में सामने आया है कि बिच्छू के जहर के कुछ अंश कैंसर की कोशिकाओं को पहचानकर उन पर असर डालते हैं, जबकि शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाते. यही कारण है कि कैंसर के इलाज को लेकर इस पर बड़े स्तर पर काम हो रहा है. इसके अलावा मिर्गी, नसों से जुड़ी बीमारियों और गंभीर दर्द के इलाज में भी इसके इस्तेमाल की संभावनाएं दिख रही हैं. खास बात यह है कि इससे बनने वाली दर्द निवारक दवाएं नशे की लत नहीं लगातीं.
यही नहीं, ब्यूटी और स्किन केयर इंडस्ट्री में भी बिच्छू के जहर की चर्चा होने लगी है. कहा जाता है कि इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो त्वचा की मरम्मत और उम्र के असर को कम करने में मदद करते हैं.
बूंद-बूंद में छुपी करोड़ों की कीमत
बिच्छू के जहर की कीमत जानकर कोई भी चौंक सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि इसे दुनिया के सबसे महंगे तरल पदार्थों में गिना जाता है. वजह साफ है एक बिच्छू से बहुत ही थोड़ी मात्रा में जहर निकलता है. कभी-कभी तो सिर्फ एक बूंद.
सोचिए, जब एक छोटी सी शीशी भरने के लिए हजारों बिच्छुओं की जरूरत पड़ती है, तो इसकी कीमत आसमान छूना लाजमी है. यही दुर्लभता इसे करोड़ों की चीज बना देती है.
किन देशों में आगे है यह कारोबार
दुनिया के कई देशों में बिच्छू के जहर पर गंभीर काम हो रहा है. ईरान इस क्षेत्र में सबसे आगे माना जाता है, जहां बिच्छू पालन को बाकायदा व्यवसाय की तरह अपनाया जा रहा है. चीन में तो पारंपरिक चिकित्सा में बिच्छू का इस्तेमाल पहले से होता आया है. मैक्सिको और अफ्रीका के कुछ देशों में भी मेडिकल रिसर्च के लिए इसका जहर इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं भारत में भी अब इस दिशा में धीरे-धीरे रुचि बढ़ रही है, हालांकि यहां यह काम अभी बहुत सीमित स्तर पर ही हो रहा है.
जहर निकालना आसान नहीं
बिच्छू से जहर निकालना किसी आम काम जैसा नहीं है. इसमें खास ट्रेनिंग, उपकरण और बहुत सावधानी की जरूरत होती है. हल्के इलेक्ट्रिक स्टिमुलेशन के जरिए बिच्छू को उत्तेजित किया जाता है, जिससे उसकी पूंछ से जहर की एक बूंद निकलती है. इस दौरान सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है, क्योंकि एक छोटी सी गलती जानलेवा साबित हो सकती है.
हर किसी के बस की बात नहीं
बिच्छू के जहर से जुड़ा कारोबार सुनने में जितना आकर्षक लगता है, उतना आसान नहीं है. इसमें पैसा, धैर्य और कानून की पूरी समझ चाहिए. हर देश में इसके लिए सख्त नियम हैं. भारत में भी बिना सरकारी अनुमति यह काम नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत आता है.
भारत में क्या हैं संभावनाएं
भारत में बिच्छू का जहर पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन यह वन्यजीव संरक्षण कानूनों के दायरे में आता है. इसका मतलब यह है कि बिना सरकारी अनुमति बिच्छू पालना या उनका जहर निकालना संभव नहीं है. अगर सही नियमों और नैतिक तरीके से यह काम किया जाए, तो भविष्य में यह भारत के लिए भी एक नया और हाई-वैल्यू बिजनेस बन सकता है.