Sawan 2025: घर के बगीचे में लगा सकते हैं भोलेनाथ का प्रिय Rudraksha, जानें पूरा प्रोसेस
Rudraksha Tree: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आध्यात्मिक साधना का समय होता है. इस पावन महीने में हर शुभ कार्य का विशेष महत्व होता है. ऐसे में अगर आप रुद्राक्ष, जो शिवजी का अत्यंत प्रिय माना जाता है, को घर में उगाना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक शुभ शुरुआत हो सकती है. सदियों से रुद्राक्ष को ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक माना जाता है. पर कम ही लोग जानते हैं कि इसे घर पर उगाना कितना आसान है. अगर सही मौसम, मिट्टी और देखभाल का ध्यान रखा जाए, तो रुद्राक्ष का पौधा आपके घर में ना सिर्फ हरियाली लाएगा, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और शुभता से भी भर देगा.

रुद्राक्ष सिर्फ मंदिरों और बाजारों में मिलने वाला धार्मिक बीज नहीं है, इसे आप अपने घर में भी उगा सकते हैं. यह एक फल देने वाला पौधा है और अगर सही तरीके से इसकी देखभाल की जाए, तो आपके आंगन में भी यह विशाल पेड़ बन सकता है.

रुद्राक्ष का पेड़ सामान्य पौधों की तरह छोटा नहीं रहता. अगर इसे खुली और उपयुक्त जगह दी जाए तो यह 60 से 80 फीट तक ऊंचा हो सकता है. इसलिए इसे लगाने के लिए ऐसे स्थान का चयन करें जहां इसे फैलने और बढ़ने की पूरी जगह मिल सके, जैसे आंगन या बगीचा.

यदि आप रुद्राक्ष को गमले में लगाना चाहते हैं तो गमला कम से कम 18-20 इंच गहरा और 10 इंच चौड़ा होना चाहिए. प्लास्टिक गमलों की बजाय टेरीकोटा या मिट्टी के गमलों का इस्तेमाल करें, जिससे पानी का निकास ठीक तरह से हो और पौधे की जड़ें सड़ने से बचें.

रुद्राक्ष को ऐसी मिट्टी चाहिए जिसमें ड्रेनेज अच्छा हो. इसके लिए 60% गार्डन मिट्टी, 30% जैविक खाद (गोबर की खाद) और 10% कोकोपीट मिलाएं. साथ ही, मिट्टी में थोड़ी सी रेत और कंकड़ भी मिलाएं ताकि मिट्टी में हवा बनी रहे और जड़ों को ऑक्सीजन मिलती रहे.

रुद्राक्ष को ठंडी और मध्यम जलवायु पसंद है. अगर आप गर्म इलाके में रहते हैं तो इसे शेड या आंशिक छांव में रखें, खासकर तब जब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाए. सर्दियों में इसे सीधी धूप में रखें ताकि यह अच्छे से फल सके.

रुद्राक्ष को नियमित पानी देना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि पानी गमले में जमा न हो. गर्मियों में सिंचाई अधिक करनी होती है और सर्दियों में कम. बारिश में अतिरिक्त पानी देने की जरूरत नहीं होती. जब पौधा 8 फीट तक बढ़ जाए तो उसकी छंटाई (प्रूनिंग) जरूर करें. साथ ही समय-समय पर जैविक खाद देते रहें.
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