Goat Pox Disease: बकरियों में तेजी से फैलती है चेचक बीमारी, इन लक्षणों से पहचानें और तुरंत कराएं टीकाकरण
बकरी चेचक एक खतरनाक वायरल बीमारी है जो तेजी से फैलकर बकरियों को गंभीर रूप से बीमार कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर लक्षण पहचानना, संक्रमित बकरियों को अलग रखना और टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. सही देखभाल और सावधानी से पशुपालक इस बीमारी से अपने झुंड को सुरक्षित रख सकते हैं.
Goat pox disease: ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन कई परिवारों के लिए आय का बड़ा सहारा है. लेकिन अगर बकरियों में कोई संक्रामक बीमारी फैल जाए तो इससे पशुपालकों को भारी नुकसान हो सकता है. ऐसी ही एक खतरनाक बीमारी है बकरी चेचक (Goat Pox). यह एक वायरल बीमारी है, जो तेजी से फैलती है और समय पर इलाज या बचाव न होने पर बकरियों की मौत तक हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, टीकाकरण और सावधानी बरतकर इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है.
क्या है बकरी चेचक और क्यों है खतरनाक
डॉ. वाई. के. सोनी, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के अनुसार बकरी चेचक एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खासतौर पर बकरियों को प्रभावित करती है. यह बीमारी एक जानवर से दूसरे जानवर में बहुत तेजी से फैल सकती है. इस बीमारी में बकरियों को तेज बुखार आता है और शरीर पर लाल चकत्ते या दाने निकलने लगते हैं. बाद में ये दाने फफोलों में बदल जाते हैं. गंभीर मामलों में बकरियों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है. यदि समय पर इलाज न मिले तो कई बार बकरियों की मौत भी हो सकती है. इसलिए पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे इस बीमारी के बारे में जागरूक रहें और समय रहते सावधानी बरतें.
बीमारी के प्रमुख लक्षण कैसे पहचानें
विशेषज्ञों के मुताबिक बकरी चेचक के लक्षण शुरुआत में हल्के दिखाई देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले सकते हैं. इस बीमारी में सबसे पहले बकरी को बुखार आता है और वह सुस्त दिखाई देने लगती है. इसके बाद बकरी के शरीर के कई हिस्सों जैसे थूथन, पलकों, कानों और थनों पर लाल धब्बे दिखाई देने लगते हैं. कुछ समय बाद ये धब्बे फफोलों में बदल जाते हैं. कई बार बकरियों की आंखों और नाक से पानी भी निकलने लगता है. यदि बीमारी ज्यादा बढ़ जाए तो बकरियों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है.
गर्मी के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
डॉ. सोनी के अनुसार बकरी चेचक का प्रकोप अक्सर गर्मी के मौसम में ज्यादा देखने को मिलता है. इस समय तापमान ज्यादा होने और जानवरों के संपर्क में रहने से बीमारी तेजी से फैल सकती है. अगर एक बकरी संक्रमित हो जाए तो यह बीमारी पूरे झुंड में फैल सकती है. कई बार इससे बड़े पैमाने पर बकरियों की मौत भी हो जाती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए गर्मी के मौसम में बकरियों की देखभाल और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.
टीकाकरण से मिलती है सबसे बेहतर सुरक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि बकरी चेचक से बचाव का सबसे असरदार तरीका टीकाकरण है. अब इस बीमारी से बचाव के लिए भारतीय इम्यूनोलॉजिकल्स द्वारा तैयार वैक्सीन भी उपलब्ध है. डॉ. सोनी के अनुसार बकरियों को लगभग 4 महीने की उम्र में पहला टीका लगवाना चाहिए. इसके बाद समय-समय पर पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीकाकरण करवाना जरूरी होता है. इसके साथ ही बकरियों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा भी दी जानी चाहिए, जिससे उनकी सेहत अच्छी बनी रहती है और बीमारियों का खतरा कम होता है.
सावधानी बरतकर रोक सकते हैं बीमारी का फैलाव
पशु विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी बकरी में बकरी चेचक के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत बाकी स्वस्थ बकरियों से अलग कर देना चाहिए. इससे बीमारी फैलने का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा बाड़े की नियमित सफाई करना, साफ पानी और अच्छा चारा देना भी जरूरी है.
पशुपालकों को चाहिए कि वे किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें. डॉ. वाई. के. सोनी के अनुसार समय पर सावधानी और टीकाकरण से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है. अगर पशुपालक जागरूक रहें और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो बकरी पालन सुरक्षित और लाभदायक व्यवसाय बना रह सकता है.