गाय से कमाई का सुनहरा मौका, चारा-दवा-इलाज सरकार का और दूध-गोबर आपका
उत्तर प्रदेश सरकार की सहभागिता योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मुफ्त गौवंश, रोज आर्थिक सहायता और इलाज की सुविधा मिल रही है. इससे पशुपालन आसान बना है. किसान दूध और गोबर से आमदनी बढ़ा रहे हैं, खेती में जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं और गांवों में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं लगातार
Sahabhagita Yojana : गांव की सुबह..आंगन में बंधी गाय, बाल्टी में गिरता दूध और खेतों के लिए तैयार होता गोबर-यही तस्वीर अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन रही है. उत्तर प्रदेश सरकार की एक खास सहभागिता योजना के तहत अब गाय पालन न सिर्फ आसान हुआ है, बल्कि कमाई और आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया भी बन रहा है. इस योजना में खर्च की चिंता सरकार की है और मेहनत व मुनाफा सीधे किसान के हाथ में आता है.
कैसे मिलेगी गाय, क्या है योजना का मकसद
इस योजना का सीधा और साफ उद्देश्य है-गौवंश संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना. जो भी व्यक्ति गाय पालन करना चाहता है, वह नजदीकी गौशाला या संबंधित विभाग में आवेदन कर सकता है. केवल 5 रुपये का एक साधारण फॉर्म भरना होता है. एक आधार कार्ड पर अधिकतम चार गौवंश मुफ्त दिए जाते हैं. यानी शुरुआत के लिए न तो खरीद का बोझ और न ही बड़ी कागजी झंझट.
चारा-भूसा और खर्च के लिए सीधी आर्थिक मदद
गाय मिलने के बाद सबसे बड़ी चिंता होती है रोज का खर्च. इस योजना में सरकार यह जिम्मेदारी भी अपने ऊपर लेती है. हर गौवंश के लिए प्रतिदिन 50 रुपये यानी महीने के 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, ताकि चारे, भूसे और जरूरी राशन का इंतजाम आसानी से हो सके. इससे छोटे और सीमांत किसान बिना दबाव के पशुपालन शुरू कर पाते हैं.
बीमार पड़ी गाय तो इलाज भी फ्री
पशुपालन में बीमारी सबसे बड़ा डर होती है, लेकिन यहां यह चिंता भी दूर कर दी गई है. अगर गौवंश बीमार पड़ता है, तो उसका इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाता है. संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी होती है, जिसके बाद डॉक्टर मौके पर पहुंचते हैं. इलाज के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है, ताकि समय पर सही उपचार मिल सके. यानी दवा और इलाज का खर्च भी किसान की जेब से नहीं जाता.
दूध, गोबर और रोजगार-तीन तरफ से फायदा
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कमाई के कई रास्ते खुलते हैं. गाय से मिलने वाला दूध परिवार के पोषण में मदद करता है, वहीं अतिरिक्त दूध बेचकर नियमित आमदनी भी होती है. गोबर से जैविक खाद बनाकर खेती में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे रासायनिक खाद का खर्च घटता है. गोबर गैस प्लांट के जरिए गैस और बिजली उत्पादन का विकल्प भी मिलता है. इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और पशुपालन एक मजबूत स्वरोजगार बनेगा.