डेयरी शुरू करने का सुनहरा मौका, ये भैंस रोज देगी 15-16 लीटर दूध.. बढ़ाएगी कमाई

अगर आप डेयरी व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं, तो ज्यादा दूध देने वाली भैंस आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. यह नस्ल रोज 15-16 लीटर तक दूध देती है और इसका रखरखाव भी ज्यादा महंगा नहीं है. सही देखभाल के साथ किसान नियमित आय और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 14 Feb, 2026 | 05:44 PM

Dairy Farming: कई किसान अब समझ चुके हैं कि सिर्फ खेती से ही नहीं, बल्कि पशुपालन से भी अच्छी कमाई की जा सकती है. खासकर डेयरी व्यवसाय ऐसा काम है जो रोजाना आमदनी देता है. अगर सही नस्ल की भैंस चुनी जाए, तो कम मेहनत में ज्यादा दूध और ज्यादा मुनाफा मिल सकता है. ऐसी ही एक भरोसेमंद और ज्यादा दूध देने वाली नस्ल है जफराबादी भैंस, जो धीरे-धीरे किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है. यह नस्ल न सिर्फ ज्यादा दूध देती है बल्कि अलग-अलग मौसम में आसानी से ढल भी जाती है. यही वजह है कि छोटे और बड़े दोनों किसान इस नस्ल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.

ज्यादा दूध देने वाली भरोसेमंद नस्ल

जफराबादी भैंस को अधिक दूध उत्पादन के लिए जाना जाता है. यह नस्ल एक दिन में औसतन 15 से 16 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है. इसके दूध में फैट की मात्रा भी ज्यादा होती है, जिससे डेयरी किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलती है. कई पशुपालकों का मानना है कि अगर सही तरीके से देखभाल की जाए, तो यह भैंस लंबे समय तक अच्छा उत्पादन  देती रहती है. यही कारण है कि डेयरी व्यवसाय शुरू करने वाले नए किसान इस नस्ल को सुरक्षित विकल्प मानते हैं. नियमित दूध उत्पादन होने से रोज की आय बनी रहती है और आर्थिक स्थिरता मिलती है.

कई राज्यों में बढ़ रही लोकप्रियता

इस भैंस का मूल स्थान गुजरात का जाफराबाद क्षेत्र माना जाता है, लेकिन अब यह नस्ल देश के कई राज्यों में पाली जा रही है. उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इसके पालन का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अलग-अलग जलवायु में खुद  को आसानी से ढाल लेती है. गर्मी हो या सर्दी, यह नस्ल सामान्य देखभाल में भी स्वस्थ रहती है. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों के किसान इसे लंबे समय तक पालना पसंद करते हैं.

कम खर्च में आसान रखरखाव

जफराबादी भैंस का रखरखाव ज्यादा मुश्किल नहीं होता. यह हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित पशु आहार खाकर स्वस्थ रह सकती है. इसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है, जिससे दवा और इलाज पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता. पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार, साफ-सफाई, समय पर टीकाकरण और सही भोजन देने से यह भैंस लंबे समय तक अच्छी दूध उत्पादन  क्षमता बनाए रखती है. कम खर्च और नियमित आय का यही संतुलन डेयरी व्यवसाय को सफल बनाता है.

कीमत और मुनाफे का आसान गणित

अगर कीमत की बात करें, तो जफराबादी भैंस  लगभग 80 हजार से 1 लाख रुपये तक में मिल सकती है. शुरुआत में यह निवेश थोड़ा बड़ा लग सकता है, लेकिन दूध उत्पादन को देखते हुए यह जल्दी ही अपनी लागत निकाल देती है. किसान रोज दूध बेचकर नियमित कमाई कर सकते हैं. कुछ सालों में लागत निकलने के बाद यह भैंस शुद्ध मुनाफा देने लगती है. जिन किसानों के पास कम जमीन है या जो खेती के साथ अतिरिक्त आय चाहते हैं, उनके लिए यह नस्ल एक मजबूत सहारा बन सकती है.

Published: 14 Feb, 2026 | 06:58 PM

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