यूपी के पशुपालकों के लिए खुशखबरी, 22 पशु अस्पताल, मोबाइल यूनिट और मुफ्त टीकाकरण की मिलेगी बड़ी सुविधा
उत्तर प्रदेश में पशुपालन को मजबूत बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं. अमरोहा जिले में पशु अस्पताल, मोबाइल वेटनरी यूनिट, मुफ्त टीकाकरण और स्वदेशी गायों को बढ़ावा देने वाली योजनाएं चल रही हैं. इन सुविधाओं से पशुपालकों को इलाज, चारा और नस्ल सुधार में मदद मिल रही है, जिससे उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है.
Animal Husbandry: गांवों में आज भी पशुपालन किसानों की आमदनी का बड़ा सहारा है. अगर पशु स्वस्थ रहें और उनकी अच्छी नस्ल हो, तो दूध उत्पादन भी बढ़ता है और किसान की कमाई भी. इसी दिशा में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार पशु चिकित्सा सुविधाओं और नस्ल सुधार पर लगातार काम कर रही है. खासकर अमरोहा जिले में अस्पताल, मोबाइल वेटनरी यूनिट और मुफ्त टीकाकरण जैसी सुविधाओं से पशुपालकों को बड़ी राहत मिल रही है.
राज्य सरकार मजबूत कर रही पशु चिकित्सा व्यवस्था
पशु चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत का आकलन और व्यवस्था राज्य सरकार करती है. यह व्यवस्था इलाके की भौगोलिक स्थिति, पशुओं की संख्या और बीमारियों की स्थिति को देखकर तय की जाती है. उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य में पशु चिकित्सा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. इसमें नए पशु अस्पतालों का निर्माण, कर्मचारियों की व्यवस्था और पशुओं के इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाना शामिल है. इसका सीधा फायदा पशुपालकों को मिल रहा है, क्योंकि अब उन्हें इलाज के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता.
नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान पर जोर
सरकार पशुओं की नस्ल सुधारने पर भी खास ध्यान दे रही है. इसके लिए वंशावली वाले सांडों के वीर्य और सेक्स सॉर्टेड वीर्य का इस्तेमाल कर कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है. इस तकनीक से अच्छी नस्ल के बछड़े पैदा होते हैं और दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ती है. इससे पशुपालकों को ज्यादा दूध उत्पादन और बेहतर कमाई का मौका मिलता है. यह योजना धीरे-धीरे गांवों तक पहुंचाई जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें.
चारे की कमी दूर करने के लिए नेपियर घास
पशुओं की अच्छी सेहत के लिए हरा चारा बहुत जरूरी होता है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार सरकारी फार्मों से नेपियर घास की जड़ों की टहनियां खरीदकर किसानों और गौशालाओं को उपलब्ध करा रही है. इन टहनियों को चरागाह भूमि में लगाकर हरा चारा तैयार किया जाता है. इससे पशुओं को सालभर पौष्टिक चारा मिलता है. जब पशुओं को अच्छा चारा मिलता है, तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दूध उत्पादन भी बढ़ता है.
स्वदेशी गायों को बढ़ावा देने के लिए खास मिशन
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वदेशी गायों के विकास और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नंद बाबा दुग्ध मिशन (एनबीडीएम) शुरू किया है. इसके तहत तीन योजनाएं चलाई जा रही हैं. पहली है नंदिनी कृषक समृद्धि योजना, जिसमें 25 स्वदेशी पशुओं की परियोजना होती है. इसकी लागत करीब 62.50 लाख रुपये है और इसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है. दूसरी योजना मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना है. इसमें 10 स्वदेशी पशुओं की परियोजना होती है जिसकी लागत 23.60 लाख रुपये है और इसमें भी 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है. तीसरी योजना मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना है, जिसमें दो स्वदेशी पशुओं के लिए अधिकतम 80 हजार रुपये तक 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है. इन योजनाओं से किसान स्वदेशी नस्ल की गाय पालकर अच्छी आमदनी कर सकते हैं.
अमरोहा जिले में मजबूत पशु चिकित्सा नेटवर्क
अमरोहा जिले में पशुपालकों को सुविधाएं देने के लिए अच्छा पशु चिकित्सा नेटवर्क बनाया गया है. यहां 22 पशु चिकित्सालय और एक रोग निदान प्रयोगशाला काम कर रही है. इसके अलावा 44 एलईओ केंद्र भी सक्रिय हैं. ये सभी केंद्र मिलकर जिले में करीब 6.50 लाख गाय-भैंसों, लगभग 70 हजार बकरियों और भेड़, सूअर, घोड़े, कुत्ते समेत करीब 5 हजार अन्य पशुओं की जरूरतों को पूरा करते हैं. इससे पशुपालकों को इलाज, सलाह और अन्य सेवाएं आसानी से मिल जाती हैं.
मोबाइल वेटनरी यूनिट और मुफ्त टीकाकरण से राहत
अमरोहा जिले में सात मोबाइल वेटनरी यूनिट भी काम कर रही हैं. अगर किसी पशु को अचानक इलाज की जरूरत हो, तो पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर सकते हैं. इसके बाद डॉक्टर घर पहुंचकर इलाज करते हैं. इसके अलावा जिले में छह बहुउद्देशीय पशु चिकित्सा वाहन भी हैं, जो दूरदराज के गांवों में नियमित रूप से पशु स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं. भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग की ओर से खुरपका-मुंहपका रोग, गलघोंटू, लम्पी स्किन डिजीज और पीपीआर जैसी बीमारियों के खिलाफ मुफ्त टीकाकरण भी कराया जा रहा है. इससे पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिल रही है.