पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी! सरकार ने खोला खजाना, सुअर पालन, डेयरी से लेकर पशु स्वास्थ्य तक मिलेगा बड़ा फायदा

केंद्र सरकार पशुधन विकास, दुग्ध उत्पादन, चारा सुरक्षा और पशु रोग नियंत्रण को मजबूत करने के लिए कई बड़ी योजनाएं लागू कर रही है. असम में आधुनिक सुअर पालन से लेकर देशभर में डेयरी, पशु स्वास्थ्य और चारा विकास पर निवेश बढ़ाकर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की तैयारी है.

नोएडा | Updated On: 28 Aug, 2026 | 08:29 PM

Animal Husbandry: देश में पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का सबसे मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है. सरकार अब केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुधन की बेहतर नस्ल, वैज्ञानिक प्रजनन, आधुनिक पशुपालन, गुणवत्तापूर्ण चारा, पशु रोग नियंत्रण और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. इसी क्रम में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए देशभर में पशुधन विकास, दुग्ध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य को नई गति दी जा रही है. उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है.

राष्ट्रीय योजनाओं से पशुपालन क्षेत्र को मिल रहा बड़ा सहारा

मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन  (NLM), पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF), राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को व्यापक सहायता दे रही है. इन योजनाओं के तहत आधुनिक पशुपालन अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रजनन, पशु रोग नियंत्रण, चारा विकास, डेयरी क्षेत्र का विस्तार और पशुधन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य पशुपालन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय बनाना है.

असम में सुअर पालन को मिलेगा आधुनिक स्वरूप

दूध, चारा और पशु स्वास्थ्य पर सरकार का बड़ा निवेश अभियान. (Photo Credit-Canva)

राज्यसभा में मंत्री ने बताया कि असम में सुअर पालन उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. राष्ट्रीय पशुधन मिशन और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के तहत आधुनिक सुअर पालन फार्म और सुअर मांस प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 23 सुअर पालन फार्म सहित 50 पशुधन परियोजनाओं  के लिए 4.98 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई. वहीं AHIDF के तहत एक सुअर पालन फार्म सहित आठ परियोजनाओं को 1.44 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी दी गई. इसके अलावा 2024-25 और 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 41.67 करोड़ रुपये, पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 124.29 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अलग-अलग गतिविधियों के लिए 7.74 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं.

सरकार ने असम में सुअर सीमेन संग्रहण एवं प्रसंस्करण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जिससे कृत्रिम गर्भाधान और आनुवंशिक सुधार को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही वैज्ञानिक सुअर पालन को बढ़ावा देने के लिए ‘सुअर पालन में सुचारू पशुपालन पद्धतियां’ नामक पुस्तिका प्रकाशित की गई है. राज्य में 9,92,863 क्लासिकल स्वाइन फीवर टीके  फ्री लगाए गए हैं, जिससे रोग नियंत्रण, रोजगार और निर्यात क्षमता को मजबूती मिली है.

दूध उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, चारा संकट से निपटने की तैयारी

दूध उत्पादन. (Photo Credit-Canva)

मंत्री ने बताया कि देश में डेयरी क्षेत्र  ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति की है. 2014-15 में जहां गायों की औसत दूध उत्पादकता 1,648 किलोग्राम प्रति पशु प्रति वर्ष थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 2,251 किलोग्राम हो गई है. इसी अवधि में देश का कुल दूध उत्पादन 146 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 248 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गया, जो लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि है. चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत गुणवत्तापूर्ण चारा बीज उत्पादन, घास, साइलेज और संपूर्ण मिश्रित राशन (TMR) अवसंरचना को सहायता दी जा रही है. पिछले पांच वर्षों में 1,152.40 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे 1.6 लाख टन गुणवत्तापूर्ण चारा बीज का उत्पादन हुआ. NLM-EDP के तहत 204 चारा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जबकि AHIDF के माध्यम से 3,602.47 करोड़ रुपये के निवेश से 174 पशु आहार संयंत्रों को सहायता प्रदान की गई.

किसानों को तकनीक, प्रशिक्षण और पशु रोग नियंत्रण का मिलेगा लाभ

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड  (NDDB) ने देशभर में 100 चारा-समृद्ध किसान उत्पादक संगठन (FPO) स्थापित किए हैं. वहीं आईसीएआर-भारतीय घासभूमि एवं चारा अनुसंधान संस्थान ने उच्च उपज वाली चारा किस्में विकसित की हैं, राज्यवार चारा विकास योजनाएं तैयार की हैं तथा 10 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया है. सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लू प्रबंधन दिशानिर्देश भी जारी किए हैं और अधिक तापमान सहन करने वाली स्वदेशी मवेशी नस्लों को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत पशुधन योजना के अंतर्गत 1962 किसान ऐप के जरिए डिजिटल परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि किसान वैज्ञानिक राशन संतुलन पद्धतियां अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकें.

इसके साथ ही मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण  कार्यक्रम (NADCP) के तहत खुरपका एवं मुंहपका रोग (FMD) तथा ब्रुसेलोसिस के विरुद्ध टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता उपलब्ध करा रही है. उनका कहना था कि इन पहलों से पशुधन की उत्पादकता बढ़ेगी, पशु रोगों पर नियंत्रण मजबूत होगा और देश में पशुपालन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी.

Published: 28 Aug, 2026 | 11:30 PM

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