भेड़-बकरी पालन पर पाएं 50 लाख तक की सब्सिडी! सरकार की इस योजना से गांव में शुरू करें बिजनेस

Sheep Goat Farming Subsidy: केंद्र सरकार ने नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) के तहत भेड़ और बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना शुरू की है. इस योजना में उद्यमियों को भेड़-बकरी पालन यूनिट स्थापित करने के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है. किसान, FPO, SHG और अन्य संस्थाएं इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं और पशुपालन को एक लाभदायक बिजनेस में बदल सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 7 Mar, 2026 | 05:11 PM

National Livestock Mission: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने और पशुपालन को मुनाफे वाला व्यवसाय बनाने के लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है. इन्हीं में से एक है नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) के तहत शुरू की गई विशेष उद्यमिता योजना. इस योजना के जरिए सरकार भेड़ और बकरी पालन को बढ़ावा दे रही है, ताकि किसान और ग्रामीण युवा खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय का स्रोत बना सकें. खास बात यह है कि इस योजना के अंतर्गत भेड़ और बकरी पालन यूनिट शुरू करने के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है. इससे पशुपालन को एक संगठित और लाभदायक बिजनेस बनाने का रास्ता आसान हो रहा है.

NLM योजना का मुख्य उद्देश्य

नेशनल लाइवस्टॉक मिशन का लक्ष्य छोटे जुगाली करने वाले पशुओं यानी भेड़ और बकरियों के क्षेत्र को मजबूत बनाना है. इसके जरिए ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस योजना का उद्देश्य इस सेक्टर में नए उद्यमियों को तैयार करना और भेड़-बकरी पालन को एक टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करना है.

इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड भेड़-बकरी उत्पादन प्रणाली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार इस योजना के माध्यम से FPO, FCO, SHG, JLG और सेक्शन 8 कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है ताकि पशुपालन के क्षेत्र में निवेश बढ़े और यह क्षेत्र असंगठित से संगठित रूप में बदल सके. इसके अलावा वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन, बेहतर पोषण और बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूकता भी फैलाने पर जोर दिया जा रहा है.

कितनी बड़ी यूनिट शुरू की जा सकती है

इस योजना के तहत उद्यमी कम से कम 500 मादा और 25 नर भेड़ या बकरी की ब्रीडिंग यूनिट स्थापित कर सकते हैं. यह यूनिट उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाली नस्लों के साथ तैयार की जाती है, जिससे बेहतर दूध, मीट और ऊन उत्पादन संभव हो सके. पशुओं की नस्ल का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है. इसलिए ऐसी नस्लों को प्राथमिकता दी जाती है जो अधिक उत्पादन क्षमता रखती हों और स्थानीय परिस्थितियों में आसानी से पनप सकें. नस्ल का चयन सरकार की गाइडलाइन सूची या राज्य सरकार की सलाह के आधार पर किया जा सकता है.

सब्सिडी कैसे और कब मिलेगी

इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकती है. यह राशि दो बराबर किस्तों में दी जाती है. पहली किस्त कुल सब्सिडी की 50 प्रतिशत होती है, जो बैंक द्वारा लोन की पहली किस्त जारी होने और सरकारी एजेंसी द्वारा सत्यापन के बाद दी जाती है. वहीं दूसरी किस्त प्रोजेक्ट के पूरी तरह तैयार होने और उसके प्रमाणन के बाद जारी की जाती है. हालांकि परियोजना की शेष राशि का इंतजाम उद्यमी को स्वयं करना होगा. इसके लिए बैंक लोन, वित्तीय संस्थानों की मदद या स्वयं की पूंजी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

क्या जमीन खरीदना जरूरी है?

इस योजना के तहत जमीन खरीदने के लिए कोई सब्सिडी नहीं दी जाती. यानी सरकार जमीन खरीदने, किराये पर लेने या लीज पर लेने के लिए सहायता प्रदान नहीं करती. सब्सिडी केवल पशुपालन यूनिट की पूंजीगत लागत के लिए ही उपलब्ध होती है.

आवेदन करने की प्रक्रिया

इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति या संस्था को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा. आवेदन के दौरान निर्धारित फॉर्म, बैंक गारंटी और जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होता है. इस योजना के लिए व्यक्तिगत उद्यमी, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG) और सेक्शन 8 कंपनियां आवेदन कर सकती हैं.

ध्यान देने वाली बात यह है कि सब्सिडी केवल पूंजीगत खर्च के लिए दी जाती है, जबकि वर्किंग कैपिटल के लिए अलग से सहायता नहीं मिलती. हालांकि यदि कोई व्यक्ति स्वयं के पैसे से प्रोजेक्ट शुरू करता है, तो भी वह सब्सिडी के लिए पात्र हो सकता है.

पशुपालन से बढ़ सकती है किसानों की आय

भेड़ और बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है. कम जगह, सीमित संसाधनों और कम लागत में शुरू होने वाला यह व्यवसाय किसानों और युवाओं के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा विकल्प बन सकता है. सरकार की यह योजना उन लोगों के लिए खास मौका है जो पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर गांव में ही आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं.

Published: 7 Mar, 2026 | 07:01 PM

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