सरकारी मदद और मेहनत का कमाल, मछली पालन बना किसानों की आमदनी का नया रास्ता
बिहार के सारण जिले में मछली पालन अब आमदनी और आत्मनिर्भरता का मजबूत साधन बन गया है. सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के सहारे हजारों किसान और युवा इस व्यवसाय से जुड़कर बेहतर जीवन की ओर बढ़ रहे हैं. बढ़ता उत्पादन जिले की नई पहचान बन रहा है.
Fisheries Development : सुबह की हल्की धूप, तालाब के किनारे खड़े किसान, पानी में छलांग लगाती मछलियां और चेहरे पर संतोष की मुस्कान-यह तस्वीर अब सारण जिले में आम हो चली है. कभी खेती के भरोसे रहने वाला यह जिला अब मछली उत्पादन के दम पर अपनी अलग पहचान बना रहा है. सरकारी सहयोग, बेहतर तकनीक और किसानों की मेहनत ने मछली पालन को यहां आर्थिक मजबूती का मजबूत आधार बना दिया है.
मछली पालन से बदली आजीविका की तस्वीर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के सारण जिले में मछली पालन सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए रोज़गार और आत्मनिर्भरता का जरिया बन चुका है. जिले में करीब 10 हजार लोग सीधे इस व्यवसाय से जुड़े हैं और 17 मत्स्यजीवी समितियां लगातार काम कर रही हैं. सरकारी और निजी तालाबों में व्यावसायिक स्तर पर मछली पालन हो रहा है, जिससे किसानों को नियमित आमदनी मिल रही है. बेहतर मुनाफे के कारण अब युवा भी इस क्षेत्र की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
आंकड़ों में दिखती है सफलता की कहानी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मत्स्य विभाग के आंकड़े इस सफलता की साफ तस्वीर पेश करते हैं. जिले में 989 सरकारी तालाब और जलकर हैं, जहां 407 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन हो रहा है. वहीं 548 निजी तालाबों और जलकरों में 254 हेक्टेयर भूमि पर व्यावसायिक मछली पालन किया जा रहा है. इसके अलावा चौर, झील और स्थायी जल क्षेत्रों को मिलाकर कुल हजारों हेक्टेयर क्षेत्र इस काम में इस्तेमाल हो रहा है. वर्ष 2024-25 में 18.43 हजार टन का वास्तविक उत्पादन हुआ, जबकि 2025-26 के लिए 19.77 हजार टन का लक्ष्य रखा गया है. विभाग को उम्मीद है कि 31 मार्च तक उत्पादन 20 हजार टन के पार पहुंच जाएगा.
प्रशिक्षण और तकनीक से बढ़ रहा भरोसा
सरकार की योजनाओं का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को सिर्फ अनुदान ही नहीं, बल्कि सही जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. समय-समय पर मछली पालकों को दूसरे जिलों और राज्यों का भ्रमण कराया जाता है. हाल ही में 50 मछली पालकों का दल सिवान गया, जहां उन्होंने बायोफ्लॉक तकनीक, मिश्रित मत्स्य पालन, मछली बीमारियों के इलाज और हैचरी संचालन की जानकारी ली. जिला मत्स्य पदाधिकारी का कहना है कि मछली पालन आज के समय की सबसे अच्छी योजनाओं में से एक है और विभाग लगातार प्रशिक्षण देकर लोगों को इससे जोड़ रहा है.
किसानों की जुबानी, मछली पालन का सच
मछली पालकों का कहना है कि पहले समझ नहीं आता था कौन सा काम करें, लेकिन सरकारी सहयोग ने सही रास्ता दिखाया. वहीं अनिल कुमार का मानना है कि कम लागत और अनुदान के साथ मछली पालन आज का सबसे बेहतर व्यवसाय है. वहीं कुछ मछली पालक बताते हैं कि अब उनके घर की आमदनी का बड़ा सहारा यही काम है. किसानों का कहना है कि अगर सरकार बड़े स्तर पर इसका प्रचार करे और मार्केटिंग व ट्रेडिंग की बेहतर व्यवस्था बनाए, तो यह व्यवसाय और भी लोगों की जिंदगी बदल सकता है.