Explainer: खेती, बाजार और आमदनी…बजट 2026 से कृषि क्षेत्र और किसानों को क्या चाहिए?

बजट 2026 से कृषि क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें हैं. किसान चाहते हैं कि यह बजट सिर्फ घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी आमदनी बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस बदलाव लाए. अगर सरकार ग्रोथ, रिसर्च, बाजार और लागत चारों मोर्चों पर संतुलित कदम उठाती है, तो यह बजट भारतीय खेती के लिए एक नए दौर की शुरुआत साबित हो सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 22 Jan, 2026 | 12:29 PM

Budget 2026 agriculture: देश का कृषि क्षेत्र एक बार फिर बजट की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है. 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी, तब गांव से लेकर मंडी और एग्री-बिजनेस से जुड़े हर व्यक्ति की यही जिज्ञासा होगी कि क्या इस बार खेती को वह सहारा मिलेगा, जिसकी लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है. बढ़ती लागत, धीमी आय और मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए यह बजट बेहद अहम माना जा रहा है.

कृषि ग्रोथ की धीमी रफ्तार बनी चिंता

पिछले एक साल के आंकड़े बताते हैं कि कृषि क्षेत्र की रफ्तार अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले सुस्त पड़ी है. जहां देश की कुल जीडीपी ग्रोथ संतोषजनक बनी हुई है, वहीं खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों की ग्रोथ अपेक्षाकृत कमजोर रही है. मौजूदा कीमतों पर कृषि की आय में बढ़ोतरी बेहद सीमित रही है, जिससे किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है. यही वजह है कि बजट 2026 में खेती को दोबारा गति देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है.

बढ़ा बजट, लेकिन जमीन पर असर क्यों कम?

बीते कुछ वर्षों में कृषि और किसान कल्याण के लिए बजट आवंटन बढ़ाया गया है. कागजों पर रकम बड़ी दिखती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय में वैसी मजबूती नजर नहीं आई. कई योजनाएं हैं, लेकिन उनका फायदा हर किसान तक नहीं पहुंच पा रहा. ऐसे में इस बार बजट से उम्मीद की जा रही है कि सिर्फ आवंटन बढ़ाने के बजाय क्रियान्वयन को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा.

रिसर्च और नई तकनीक पर क्यों जरूरी है निवेश

खेती को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए रिसर्च और इनोवेशन बेहद जरूरी हैं. बदलते मौसम, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान ने खेती को जोखिम भरा बना दिया है. ऐसे में ऐसे बीज, तकनीक और तरीके चाहिए जो कम पानी में ज्यादा उत्पादन दे सकें और मौसम की मार को झेल सकें. उम्मीद है कि बजट 2026 में कृषि अनुसंधान के लिए फंड बढ़ाया जाएगा और निजी कंपनियों को भी रिसर्च में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

बाजार और दाम की सुरक्षा पर फोकस की दरकार

किसानों की सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि सही दाम भी है. कई बार अच्छी पैदावार के बावजूद बाजार में भाव गिर जाते हैं. इस बजट से उम्मीद है कि कृषि बाजारों को मजबूत बनाने, कीमतों के जोखिम से बचाव और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे. कमोडिटी बाजारों में पारदर्शिता और किसानों की भागीदारी बढ़ाने से उन्हें अपनी फसल का सही मूल्य मिल सकता है.

बढ़ती लागत से राहत की उम्मीद

बीज, खाद, कीटनाशक और डीजल की बढ़ती कीमतें किसानों की कमर तोड़ रही हैं. बजट 2026 में इनपुट लागत घटाने के लिए कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. खासतौर पर कीटनाशकों और कृषि से जुड़े जरूरी सामान पर टैक्स कम करने की मांग उठ रही है. इससे किसानों पर खर्च का बोझ कुछ हद तक हल्का हो सकता है.

इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलेगी गांवों की तस्वीर

खेती में नुकसान का बड़ा कारण फसल कटाई के बाद होने वाली बर्बादी है. अगर बजट में वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और बेहतर परिवहन पर निवेश बढ़ाया जाता है, तो किसानों की आमदनी में सीधा इजाफा हो सकता है. इसके साथ ही डिजिटल तकनीक को भौतिक ढांचे से जोड़ने पर भी जोर दिया जा सकता है, जिससे फसल की गुणवत्ता, ट्रैकिंग और बिक्री आसान हो सके.

क्या बजट 2026 बनेगा खेती के लिए टर्निंग पॉइंट?

बजट 2026 से कृषि क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें हैं. किसान चाहते हैं कि यह बजट सिर्फ घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी आमदनी बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस बदलाव लाए. अगर सरकार ग्रोथ, रिसर्च, बाजार और लागत चारों मोर्चों पर संतुलित कदम उठाती है, तो यह बजट भारतीय खेती के लिए एक नए दौर की शुरुआत साबित हो सकता है.

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Published: 22 Jan, 2026 | 10:28 AM

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