गर्मी में भी बाल्टी भर दूध देगी ये देसी गायें, कम खर्च में ज्यादा कमाई का आसान तरीका
गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन कम होना आम समस्या है, लेकिन कुछ देसी नस्ल की गायें इस चुनौती को आसान बना देती हैं. सही नस्ल जैसे गिर, साहीवाल और लाल सिंधी का पालन करने से गर्मी में भी अच्छा दूध मिलता है. इससे पशुपालकों को कम खर्च में ज्यादा मुनाफा मिल सकता है.
Dairy Farming: तेज गर्मी में जब ज्यादातर गायों का दूध कम हो जाता है, तब पशुपालकों की चिंता बढ़ जाती है. लेकिन अगर सही नस्ल की गाय चुनी जाए, तो गर्मी में भी दूध की बाल्टी भर सकती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार कुछ खास देसी नस्लें ऐसी हैं, जो गर्मी में भी अच्छा दूध देती हैं और किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित होती हैं.
गर्मी में भी नहीं घटेगा दूध, सही नस्ल चुनना जरूरी
पशु चिकित्सक के अनुसार, गर्मी के मौसम में ज्यादातर पशु तनाव में आ जाते हैं, जिससे उनका दूध उत्पादन कम हो जाता है. लेकिन गिर, साहीवाल, लाल सिंधी और थारपारकर जैसी देसी नस्लें इस मौसम को आसानी से सहन कर लेती हैं. इन नस्लों की खास बात यह है कि ये गर्मी में भी स्वस्थ रहती हैं और दूध देना जारी रखती हैं. इसलिए डेयरी करने वाले किसानों को इन नस्लों का पालन करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
गिर गाय का दूध सबसे महंगा और ज्यादा
गिर नस्ल की गाय को दुनिया की बेहतरीन दुधारू नस्लों में गिना जाता है. इसका दूध बाजार में 100 से 150 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है. अगर सही तरीके से पालन किया जाए, तो यह गाय रोजाना 20 से 25 लीटर तक दूध दे सकती है. एक बार बच्चा देने के बाद ये लगभग 2000 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. इस वजह से गिर गाय डेयरी किसानों के लिए सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली नस्ल मानी जाती है.
साहीवाल और लाल सिंधी भी हैं बेहतर विकल्प
साहीवाल गाय भी दूध देने के मामले में काफी आगे है. ये रोजाना 10 से 15 लीटर दूध देती है और अच्छी देखभाल पर 25 से 30 लीटर तक दूध दे सकती है. वहीं, लाल सिंधी गाय भी 12 से 20 लीटर तक दूध देने के लिए जानी जाती है. सही खुराक और देखभाल से इसका उत्पादन और बढ़ सकता है. लाल सिंधी गाय एक बार बच्चा देने के बाद करीब 1800 लीटर तक दूध दे सकती है, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद है.
कम खर्च में ज्यादा फायदा, डेयरी बनेगी मुनाफे का सौदा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, सही नस्ल के चयन से किसानों को ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती. गर्मी में जहां दूसरी गायों के लिए ज्यादा देखभाल और दवाइयों की जरूरत होती है, वहीं ये देसी नस्लें कम देखभाल में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं. इससे किसानों का खर्च कम होता है और मुनाफा बढ़ता है. साथ ही, इन नस्लों का दूध भी अच्छा और ज्यादा दाम में बिकता है.