हिमाचल समेत कई राज्यों ने मछली पकड़ने पर लगा प्रतिबंध हटाया, बाजार में आवक बढ़ी
दो महीने के इंतजार के बाद हिमाचल के जलाशयों में मछली पकड़ने की छूट मिली तो नतीजे चौंकाने वाले रहे. महज एक सप्ताह में 110 टन से ज्यादा मछली पकड़ी गई. पिछले साल के मुकाबले पकड़ करीब 47 फीसदी बढ़ी, जिससे मछुआरों के चेहरे खिल उठे.
मॉनसून और मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए देश के कई राज्यों में लगाए गए मौसमी मछली पकड़ने के प्रतिबंध अब खत्म हो चुके हैं. प्रतिबंध हटने के बाद हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में मत्स्य पकड़ में बड़ा उछाल देखने को मिला है. राज्य के पांच प्रमुख जलाशयों में महज एक सप्ताह में 110 मीट्रिक टन से ज्यादा मछली पकड़ी गई, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 47 फीसदी अधिक है. इसी तरह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी 15 अगस्त के बाद मछली पकड़ने की गतिविधियां फिर शुरू हो गई हैं. समुद्री राज्यों में भी वार्षिक 61 दिन का प्रतिबंध पूरा होने के बाद मछली पकड़ने का काम सामान्य हो चुका है. इसके साथ ही बाजार में मछली की आवक में भी इजाफा दर्ज किया जा रहा है.
एक सप्ताह में 110 टन से ज्यादा मछली की पकड़
हिमाचल प्रदेश में दो महीने के मौसमी मत्स्य आखेट प्रतिबंध के बाद 15 अगस्त को मछली पकड़ने की अनुमति दी गई. इसके बाद शुरुआती एक सप्ताह में पांच प्रमुख जलाशयों से 110 मीट्रिक टन से अधिक मछली पकड़ी गई. मत्स्य पालन विभाग के निदेशक ओम कांत ठाकुर के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में करीब 75 मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई थी. यानी इस साल 35 मीट्रिक टन से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. प्रतिबंध हटने के पहले ही दिन करीब 46 मीट्रिक टन मछली की पकड़ दर्ज की गई.
पोंग डैम और गोविंद सागर सबसे आगे
23 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार पोंग डैम में करीब 51 मीट्रिक टन और गोविंद सागर में 50 मीट्रिक टन से ज्यादा मछली पकड़ी गई. रंजीत सागर में करीब 7.5 मीट्रिक टन, जबकि चमेरा और कोल डैम में संयुक्त रूप से करीब एक मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई. प्रजातियों की बात करें तो सिंघाड़ा करीब 35 टन और सिल्वर कार्प करीब 34 टन के साथ सबसे आगे रहे. इसके अलावा रोहू 12 टन, कॉमन कार्प 10 टन, मिरर कार्प व महाशीर करीब 5 टन और कतला 4 टन से ज्यादा पकड़ी गई.
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बेहतर जलस्तर और मत्स्य बीज से मिला फायदा
मत्स्य विभाग के मुताबिक इस साल जलाशयों में अनुकूल जलस्तर ने मछलियों के लिए बेहतर परिस्थितियां तैयार कीं. विभाग ने करीब एक करोड़ मत्स्य बीज का संचयन भी किया, जिससे मत्स्य संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली. इसके साथ ही लैंडिंग सेंटरों से मिलने वाले आंकड़ों को ऑनलाइन एक्सेल आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा गया है. अब जलाशय और प्रजाति के हिसाब से रोजाना मत्स्य पकड़ का रिकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है.
कई राज्यों में खत्म हुआ मौसमी प्रतिबंध
हिमाचल प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी 16 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर मौसमी रोक रहती है. प्रजनन काल पूरा होने के बाद यहां भी मछली पकड़ने की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं. वहीं समुद्री तटीय राज्यों में भारत सरकार के निर्देश के अनुसार सालाना 61 दिन का मत्स्य आखेट प्रतिबंध लागू रहता है. पूर्वी तट पर यह अवधि 15 अप्रैल से 14 जून और पश्चिमी तट पर 1 जून से 31 जुलाई तक रहती है. अगस्त के अंत तक अधिकांश प्रमुख आंतरिक जलाशयों और समुद्री क्षेत्रों में मौसमी प्रतिबंध समाप्त हो चुका है. इसका उद्देश्य मछलियों के प्रजनन के दौरान संरक्षण सुनिश्चित करना और आने वाले समय में मत्स्य संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखना है.