राज्य सरकार ने चराई नीति-2026 को मंजूरी दी, 44 लाख पशुओं और 10 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

Animal Grazing Policy 2026 : पशुपालन विभाग के सहयोग से वन विभाग एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगा. इसमें पशुपालकों को छह महीने के भीतर अपना नाम, पता, पशुओं की संख्या, पारंपरिक चराई मार्ग और पड़ाव स्थलों का पंजीकरण कराना होगा.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 15 Jun, 2026 | 12:16 PM

पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुधारने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हिमाचल सरकार ने हिमाचल प्रदेश चराई नीति-2026 को मंजूरी दे दी है. सरकार के इस फैसले से राज्य के 44 लाख से ज्यादा पशुओं को हरे चरागाहों का रास्ता खुल गया है तो वहीं 10 लाख से ज्यादा पशुपालक परिवारों को भी हरे चारे के संकट से बड़ी राहत मिली है. राज्य सरकार ने कहा है कि नई नीति के तहत कई नियमों को आसान किया गया है और पशुपालकों का रजिस्ट्रेश ऑनलाइन कर दिया गया है.

पारंपरिक प्रतिबंधों को हटाकर वैज्ञानिक तरीका अपनाया

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में तैयार ‘हिमाचल प्रदेश चराई नीति-2026’ को मंजूरी दे दी गई है. इस नीति में पारंपरिक प्रतिबंधों की जगह वैज्ञानिक और लचीला दृष्टिकोण अपनाया जाएगा. इससे पशुओं के लिए हरे वनीय चरागाह खुल जाएंगे और मिट्टी को गोबर आदि से पोषण मिलेगा. नई नीति के तहत अगले छह महीने में ऑनलाइन पोर्टल पर पशुपालकों को पंजीकरण कराना होगा.

पशुओं का दूध उत्पादन और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी

राज्य सरकार की नई चराई नीति समावेशी, टिकाऊ और सशक्त पशुपालन अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी. इससे पशुओं के लिए हरे और पौष्टिक चारे की मुश्किलें दूर होंगी और उनकी दूध उत्पादन झमता बढ़ेगी. इस नीति में चराई प्रबंधन को पर्यावरणीय संतुलन और आर्थिक सशक्तिकरण के अनुरूप बनाया गया है. जिम्मेदार चराई को घास भूमि की उत्पादकता बनाए रखने, मिट्टी में कार्बन भंडारण बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण का प्रभावी माध्यम माना गया है.

सभी पशुपालकों को 6 महीने के भीतर कराना होगा रजिस्ट्रेशन

पशुपालन विभाग के सहयोग से वन विभाग एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगा. इसमें पशुपालकों को छह महीने के भीतर अपना नाम, पता, पशुओं की संख्या, पारंपरिक चराई मार्ग और पड़ाव स्थलों का पंजीकरण कराना होगा. इस जानकारी को हिम परिवार और भारत पशुधन पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे पहचान और विवरण का सत्यापन आसानी से हो सकेगा.

कई साल से चराई कर रहे पशुपालकों को मिलेगी मान्यता

नीति की खास बात यह है कि बिना औपचारिक अनुमति के वर्षों से चराई कर रहे पारंपरिक पशुपालकों को भी मान्यता मिलेगी. पंजीकरण के बाद स्थानीय चराई सलाहकार समितियां मामलों की समीक्षा कर नए परमिट जारी करेंगी. नई चराई अनुमति पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर दी जाएगी. इसके लिए चरागाहों की उपलब्धता, वन क्षेत्रों की वहन क्षमता, वन्यजीवों की जरूरतें और स्थानीय लोगों के पारंपरिक चराई अधिकारों का आकलन किया जाएगा.

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