बकरी पालन में कमाई बढ़ानी है तो स्वास्थ्य पर दें सबसे ज्यादा ध्यान, जानिए क्या कहता है विभाग

बकरी पालन को फायदे का व्यवसाय बनाने के लिए पशुओं की सेहत पर नियमित ध्यान देना बेहद जरूरी माना गया है. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पेट के कीड़ों की दवा, साफ-सफाई और संतुलित आहार से बकरियों का वजन तेजी से बढ़ता है. सही देखभाल अपनाने से पशुपालक बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 May, 2026 | 11:01 PM

Goat Farming: ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन तेजी से किसानों और पशुपालकों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है. कम लागत, जल्दी बढ़ने वाला कारोबार और बाजार में लगातार मांग होने की वजह से लोग बड़े स्तर पर बकरी पालन की ओर बढ़ रहे हैं. लेकिन कई बार सही देखभाल और समय पर इलाज नहीं होने के कारण पशुपालकों को नुकसान भी उठाना पड़ता है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार अगर बकरियों के स्वास्थ्य पर नियमित ध्यान दिया जाए, तो कम समय में बेहतर वजन, अच्छी बढ़वार और ज्यादा मुनाफा हासिल किया जा सकता है.

बकरी पालन में सबसे जरूरी है स्वास्थ्य की सही देखभाल

बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार बकरी पालन  को लाभकारी बनाने के लिए सबसे पहले पशुओं के स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है. कई पशुपालक सिर्फ चारा और दाना देने को ही पर्याप्त समझ लेते हैं, लेकिन नियमित स्वास्थ्य जांच और दवा भी उतनी ही जरूरी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बकरियों की समय-समय पर देखभाल नहीं की गई, तो उनका वजन कम हो सकता है और कई बीमारियां भी फैल सकती हैं. इससे दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुओं की ताकत पर भी असर पड़ता है. इसलिए पशुपालकों को साफ-सफाई, संतुलित आहार और समय पर दवाइयों का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.

हर तीन महीने में जरूरी है पेट के कीड़ों की दवा

विभाग के मुताबिक बकरियों में पेट के कीड़े  एक बड़ी समस्या बन सकते हैं. यही वजह है कि हर तीन महीने में बकरियों को पेट के कीड़ों की दवा देने की सलाह दी गई है. कई लोग इसे नसबंदी समझ लेते हैं, लेकिन विभाग ने साफ किया है कि कृमिनाशन का मतलब केवल पेट के कीड़ों की रोकथाम करना होता है. अगर समय पर कीड़ों की दवा दी जाए तो बकरियों का वजन तेजी से बढ़ता है और उनकी सेहत भी बेहतर रहती है. पेट में कीड़े होने पर बकरियां कमजोर होने लगती हैं, खाना कम खाती हैं और धीरे-धीरे उनका विकास रुक जाता है. इसलिए नियमित दवा देना बहुत जरूरी माना गया है.

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Published: 16 May, 2026 | 11:01 PM
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