गर्मी में पशुओं का कैसे रखें ध्यान, इन बातों का करेंगे पालन तो कभी बीमार नहीं होंगे मवेशी

गर्मी और तेज लू का असर अब पशुओं की सेहत पर भी दिखने लगा है. सही देखभाल न मिलने पर दुधारू पशु बीमार पड़ सकते हैं और दूध उत्पादन कम हो सकता है. विशेषज्ञों ने पशुपालकों को गर्मियों में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है, जिससे पशुओं को हीट स्ट्रेस और लू से बचाया जा सके.

नोएडा | Updated On: 15 May, 2026 | 08:11 PM

Heat Stress: देशभर में बढ़ती गर्मी और तेज लू अब इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी बड़ी परेशानी बनती जा रही है. खासकर गाय और भैंस जैसे दुधारू पशु गर्म हवाओं और ज्यादा तापमान की वजह से जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं. गर्मियों में पशुओं को सही देखभाल न मिलने पर हीट स्ट्रोक यानी लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत पर पड़ता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, अगर समय रहते सही देखभाल की जाए, तो पशुओं को गर्मी से होने वाली कई गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है. थोड़ी सी सावधानी पशुपालकों को बड़े नुकसान से बचा सकती है.

गर्मी बढ़ते ही पशुओं में बढ़ने लगता है हीट स्ट्रेस

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, गर्मियों में तापमान लगातार बढ़ने से पशुओं के शरीर का तापमान  भी तेजी से बढ़ने लगता है. जब पशु अपने शरीर की गर्मी को सामान्य नहीं रख पाते, तब उन्हें हीट स्ट्रेस होने लगता है. यही स्थिति आगे चलकर लू का रूप ले सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार गर्म हवाएं और तेज धूप पशुओं के शरीर पर सीधा असर डालती हैं. इससे पशु बेचैन रहने लगते हैं और उनकी खाने-पीने की क्षमता भी कम हो जाती है. गर्मी के कारण पशुओं में पानी और नमक की कमी होने लगती है. इसका असर उनके शरीर की ताकत पर पड़ता है और धीरे-धीरे दूध उत्पादन भी कम होने लगता है. कई बार पशु कमजोर होकर दूसरी बीमारियों की चपेट में भी आ जाते हैं. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है और पशु की जान पर भी खतरा बन सकता है.

इन संकेतों से पहचानें कि पशु को लग रही है लू

पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे गर्मियों में पशुओं के व्यवहार  पर लगातार नजर रखें. अगर कोई पशु मुंह खोलकर तेजी से सांस ले रहा हो, ज्यादा हांफ रहा हो या उसके मुंह से लार गिर रही हो, तो यह लू लगने के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा पशु की भूख कम होना, बार-बार पानी पीना, शरीर गर्म लगना और दूध उत्पादन कम होना भी हीट स्ट्रेस के लक्षण माने जाते हैं. कई बार पशु बेचैन होकर बार-बार उठने-बैठने लगता है. कुछ मामलों में पेशाब कम हो जाता है और दिल की धड़कन भी तेज हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, इसलिए तुरंत देखभाल शुरू करना जरूरी है.

गर्मियों में ऐसे रखें पशुओं को सुरक्षित

गर्मी के मौसम में पशुओं को ठंडी और साफ जगह पर रखना सबसे जरूरी माना जाता है. पशुशाला में हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. जहां संभव हो, वहां पंखे या कूलर का इस्तेमाल करना फायदेमंद रहता है. पशुओं को दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी देना चाहिए, ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो. भैंसों को गर्मियों में दो से तीन बार नहलाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है. इससे उन्हें काफी राहत मिलती है. पशुओं के खाने में संतुलित आहार देना भी जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार मिनरल मिक्सचर, हरा चारा, जौ और गेहूं का चोकर गर्मियों में काफी फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा पशुओं को सुबह जल्दी या शाम को चराने ले जाना चाहिए, ताकि वे तेज धूप और लू से बच सकें.

लू लगने पर तुरंत करें सही इलाज

अगर किसी पशु को लू लग जाए, तो सबसे पहले उसे धूप से हटाकर ठंडी और छायादार जगह पर रखना चाहिए. पशु के शरीर पर ठंडा पानी डालने या गीले कपड़े  रखने से शरीर का तापमान कम करने में मदद मिलती है. कई पशुपालक पशु को पानी भरे गड्ढे में खड़ा करके भी राहत पहुंचाते हैं. घरेलू उपाय के तौर पर ठंडे पानी में थोड़ा नमक, चीनी और भुने जौ का आटा मिलाकर पिलाना फायदेमंद माना जाता है. इससे शरीर में पानी और नमक की कमी पूरी करने में मदद मिलती है. कुछ लोग पुदीना और प्याज का रस भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे पशु को राहत मिल सकती है. विशेषज्ञ का कहना है कि अगर पशु की हालत ज्यादा खराब हो, तेज बुखार हो या वह लगातार कमजोर दिखे, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. सही समय पर इलाज मिलने से पशु जल्दी ठीक हो सकता है और बड़ा नुकसान टाला जा सकता है.

Published: 15 May, 2026 | 09:38 PM

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