गांव में मुर्गी फार्म कैसे शुरू करें? कम लागत में शुरू होने वाला यह बिजनेस दे सकता है अच्छी कमाई

गांव में मुर्गी फार्मिंग कम लागत में शुरू होने वाला ऐसा बिजनेस है जो किसानों और युवाओं को अतिरिक्त आय दे सकता है. सही नस्ल, साफ जगह और नियमित देखभाल से अंडा और मांस दोनों का अच्छा उत्पादन मिलता है. सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की मदद से इस काम को शुरू करना और भी आसान हो जाता है.

नोएडा | Published: 7 Mar, 2026 | 11:46 AM

Poultry Farming: गांवों में आज भी बहुत से युवा ऐसे हैं जो खेती के साथ कोई छोटा लेकिन भरोसेमंद बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. ऐसे में मुर्गी पालन यानी पॉल्ट्री फार्मिंग एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आ रहा है. कम जमीन, कम लागत और थोड़ी सी मेहनत के साथ यह काम शुरू किया जा सकता है. अगर सही नस्ल, सही जगह और बुनियादी देखभाल का ध्यान रखा जाए तो मुर्गी फार्म से हर महीने अच्छी कमाई हो सकती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार, गांव में छोटे स्तर से मुर्गी पालन शुरू करके धीरे-धीरे इसे बड़े बिजनेस में बदला जा सकता है.

गांव में मुर्गी फार्म शुरू करना क्यों है आसान

मुर्गी पालन  की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा जमीन या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती. गांव में घर के खाली आंगन, खेत के किनारे या किसी छोटे शेड में भी मुर्गियां पाली जा सकती हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के मुताबिक अगर शुरुआत में किसान या युवा छोटा सेटअप लगाते हैं तो उन्हें ज्यादा जोखिम भी नहीं उठाना पड़ता. मुर्गियां जल्दी बढ़ती हैं और कुछ ही महीनों में अंडे या मांस के जरिए आमदनी शुरू हो जाती है. यही कारण है कि आजकल कई ग्रामीण परिवार पॉल्ट्री फार्मिंग को अतिरिक्त आय के रूप में अपना रहे हैं.

शुरुआत में कितनी लगती है लागत

मुर्गी फार्म शुरू करने से पहले सबसे जरूरी है कि आप साफ और हवादार जगह का चुनाव करें. जहां धूप भी आती हो और बारिश या ठंड से बचाव की व्यवस्था भी हो. इसके अलावा पानी और दाने की सुविधा पास में होनी चाहिए. अगर कोई व्यक्ति शुरुआत में 20 से 25 मुर्गियों के साथ काम शुरू करता है तो करीब 45,000 से 55,000 रुपये तक का खर्च आ सकता है. इसमें चूजे खरीदने का खर्च, छोटा शेड बनाने की लागत, दाना-पानी के बर्तन, फीड और जरूरी दवाइयां शामिल होती हैं. जैसे-जैसे मुर्गियों की संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे निवेश भी बढ़ता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि शुरुआत छोटी करके भी धीरे-धीरे फार्म को बड़ा किया जा सकता है.

अच्छी नस्ल का चुनाव बहुत जरूरी

मुर्गी पालन में सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस नस्ल की मुर्गियां पाल रहे हैं. अगर सही नस्ल चुनी जाए तो अंडा और मांस दोनों का उत्पादन अच्छा मिलता है. विशेषज्ञों के अनुसार कड़कनाथ, ग्रामप्रिया, स्वरनाथ, केरी श्यामा, निर्भीक, श्रीनिधि, वनराजा और कारी उज्जवल जैसी नस्लें गांव के माहौल में आसानी से पाली जा सकती हैं. इन नस्लों की खासियत यह है कि ये जल्दी बढ़ती हैं और अंडा उत्पादन भी अच्छा देती हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार मुर्गियों का समय-समय पर टीकाकरण कराना भी बहुत जरूरी है. इससे बीमारी का खतरा कम रहता है और फार्म को नुकसान से बचाया जा सकता है.

मुर्गी फार्म से कितनी हो सकती है कमाई

अगर कमाई की बात करें तो मुर्गी पालन एक नियमित आय देने वाला बिजनेस बन सकता है. आमतौर पर एक देसी मुर्गी सालभर में करीब 160 से 180 अंडे दे सकती है. अगर आपके पास अच्छी संख्या में लेयर मुर्गियां हैं तो अंडों की बिक्री  से हर महीने अच्छी आमदनी हो सकती है. वहीं अगर मुर्गियों को मांस के लिए पाला जाए तो ब्रॉयलर मुर्गियां करीब 40 से 45 दिनों में बाजार के लिए तैयार हो जाती हैं. ऐसे में किसान जल्दी पैसा कमा सकते हैं. अगर आसपास बाजार, होटल या दुकानों से संपर्क बना लिया जाए तो मुर्गियों और अंडों की बिक्री में कोई दिक्कत नहीं आती. सही मार्केट मिलने पर कई बार लागत से दोगुना तक मुनाफा भी मिल सकता है.

केंद्र सरकार भी दे रही है मदद

पॉल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार भी कई योजनाएं चला रही है. नेशनल लाइवस्टॉक मिशन  के तहत मुर्गी पालन शुरू करने वाले लोगों को करीब 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है. इसके अलावा NABARD और कई बैंक भी पॉल्ट्री फार्मिंग के लिए आसान लोन उपलब्ध कराते हैं. अगर कोई युवा या किसान सही योजना बनाकर आवेदन करता है तो उसे आर्थिक मदद मिल सकती है. इससे कम पूंजी वाले लोग भी आसानी से इस बिजनेस की शुरुआत कर सकते हैं.

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