Poultry Farming : खेती आज सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही. बढ़ती लागत और अनिश्चित आमदनी के बीच किसान अब ऐसे काम तलाश रहे हैं, जिनसे कम जमीन, कम जोखिम और नियमित कमाई हो सके. इसी तलाश में मुर्गी पालन तेजी से किसानों की पसंद बनता जा रहा है. सही नस्ल और थोड़ी समझदारी के साथ यह काम किसानों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हो सकता है. खास बात यह है कि सरकार भी इसमें सब्सिडी और लोन देकर पूरा साथ दे रही है.
खेती के साथ मुर्गी पालन क्यों बन रहा है कमाई का मजबूत जरिया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज के समय में किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन और मुर्गी पालन को जोड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. मुर्गी पालन में ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती और शुरुआत छोटे स्तर से भी की जा सकती है. अंडे और चिकन की मांग पूरे साल बनी रहती है, जिससे बाजार की चिंता भी कम रहती है. यही वजह है कि गांव से लेकर कस्बों तक पोल्ट्री फार्म तेजी से खुल रहे हैं.
सही नस्ल का चुनाव, मुनाफे की पहली शर्त
मुर्गी पालन में सबसे जरूरी होता है सही नस्ल का चयन. अगर नस्ल अच्छी है, तो कम खर्च में ज्यादा उत्पादन मिलता है और बीमारी का खतरा भी कम रहता है. विशेषज्ञों के अनुसार नीचे दी गई तीन नस्लें किसानों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी जाती हैं.
कड़कनाथ, वनराजा और ग्रामप्रिया क्यों हैं खास
कड़कनाथ मुर्गी अपने काले रंग के मांस के लिए मशहूर है. इसे सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, इसलिए बाजार में इसकी कीमत सामान्य मुर्गियों से कई गुना ज्यादा मिलती है. वनराजा नस्ल तेजी से बढ़ने वाली मुर्गी है, जो कम समय में अच्छा वजन पकड़ लेती है. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, जिससे नुकसान का खतरा कम रहता है. ग्रामप्रिया नस्ल अंडा उत्पादन के लिए जानी जाती है. यह जल्दी अंडे देना शुरू कर देती है और सालभर अच्छी संख्या में अंडे देती है, जिससे नियमित आय होती है.
सरकार की मदद से कैसे शुरू करें मुर्गी पालन
केंद्र और राज्य सरकारें मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं. नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) के तहत पोल्ट्री फार्म खोलने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है. यह सब्सिडी शेड बनाने, मशीनरी और चूजों की खरीद पर दी जाती है. इसके अलावा नाबार्ड और कई बैंक कम ब्याज पर लोन भी देते हैं. अगर खर्च की बात करें, तो 10-15 मुर्गियों से शुरुआत करने पर करीब 50 हजार रुपये लगते हैं. सही देखभाल और अच्छे बाजार में बिक्री करने पर किसान अपनी लागत से दोगुना तक मुनाफा कमा सकता है. बड़े स्तर पर यही काम लाखों की सालाना कमाई का जरिया बन सकता है.