दूध बढ़ाना है तो पशुओं के खाने पर दें ध्यान, सही दाना-चारा बदल सकता है डेयरी की पूरी कमाई

डेयरी में ज्यादा दूध और स्वस्थ पशुओं का सबसे बड़ा राज संतुलित आहार है. हरा चारा, सूखा चारा, मिनरल मिक्सचर और साफ पानी का सही संतुलन पशुओं की वृद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता और दूध उत्पादन बढ़ाता है. सही फीडिंग से खर्च घटता है, पशु कम बीमार पड़ते हैं और किसान की आय बेहतर होती है.

नोएडा | Published: 5 Apr, 2026 | 10:42 AM

Dairy Farming: डेयरी में सफलता सिर्फ अच्छी नस्ल के पशु से नहीं मिलती, असली खेल उनके खानपान का होता है. कई बार किसान अच्छा पशु खरीद लेते हैं, लेकिन सही दाना-चारा न मिलने से दूध उम्मीद से कम मिलता है. पशु कमजोर पड़ने लगते हैं, बार-बार बीमार होते हैं और दवा का खर्च बढ़ जाता है. यही वजह है कि पशुपालन और डेयरी विभाग लगातार किसानों को समझा रहा है कि बेहतर आहार ही बेहतर भविष्य की कुंजी है. सही पोषण से पशु स्वस्थ रहते हैं, दूध उत्पादन बढ़ता है और डेयरी लंबे समय तक फायदे का सौदा बनती है.

संतुलित आहार ही डेयरी की मजबूत नींव

विशेषज्ञों के अनुसार, पशुओं को सिर्फ भूसा या सूखा चारा  खिलाना काफी नहीं होता. उनके शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन की जरूरत होती है. जब ये सभी चीजें सही मात्रा में मिलती हैं, तभी पशु पूरी क्षमता से दूध देते हैं. इसीलिए संतुलित आहार में सूखा चारा, हरा चारा, दाना और मिनरल मिक्सचर का सही मिश्रण जरूरी माना जाता है. पशुपालन विभाग के अनुसार, सही फीडिंग से पशुओं की वृद्धि, प्रजनन क्षमता और रोगों से लड़ने की ताकत बेहतर होती है. इससे किसान को लंबे समय तक लगातार अच्छा उत्पादन मिलता है.

हरा चारा और सूखा चारा दोनों हैं जरूरी

डेयरी में कई किसान सिर्फ भूसा या बाजार का दाना ज्यादा दे देते हैं, लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता. पशुओं के लिए हरा चारा  बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे शरीर में नमी, पाचन और पोषण बेहतर रहता है. बरसीम, नेपियर, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसे हरे चारे पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं. इसके साथ सूखा चारा जैसे भूसा, पराली या सूखी घास भी जरूरी है, क्योंकि इससे जुगाली सही रहती है. अगर किसान हरे और सूखे चारे का सही संतुलन रखें, तो पशु ज्यादा स्वस्थ रहते हैं और दूध में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलती है.

संतुलित आहार से डेयरी में मुनाफा और उत्पादन दोनों बढ़ें.

मिनरल मिक्सचर और साफ पानी से बढ़ेगा दूध

कई बार किसान अच्छी नस्ल और अच्छा चारा देने के बाद भी दूध कम होने की शिकायत करते हैं. इसका बड़ा कारण मिनरल्स की कमी  होता है. कैल्शियम, फॉस्फोरस, नमक और दूसरे जरूरी मिनरल्स पशु के शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं. इसलिए दाने में मिनरल मिक्सचर और नमक मिलाकर देना चाहिए. इससे हड्डियां मजबूत रहती हैं, दूध बढ़ता है और पशु जल्दी कमजोर नहीं पड़ते. इसके साथ साफ और ताजा पानी हर समय उपलब्ध होना चाहिए. पशु जितना ज्यादा पानी पिएगा, उतना बेहतर दूध उत्पादन देगा. गर्मी में पानी की कमी सीधे दूध पर असर डालती है. इसलिए पानी की व्यवस्था को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

सही फीडिंग से किसान की कमाई होगी दोगुनी

विशेषज्ञों का मानना है कि डेयरी में खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा दाना-चारा होता है. अगर किसान बिना योजना के खिलाते हैं, तो खर्च बढ़ता है लेकिन दूध उतना नहीं बढ़ता. वहीं, अगर पशु की उम्र, वजन और दूध देने की क्षमता के हिसाब से संतुलित राशन दिया जाए, तो कम खर्च में ज्यादा फायदा मिलता है. सही फीडिंग से पशु कम बीमार पड़ते हैं, प्रजनन बेहतर होता है और दूध की क्वालिटी  भी अच्छी रहती है. इससे बाजार में बेहतर दाम मिलता है और किसान की आय तेजी से बढ़ती है. पशुपालन और डेयरी विभाग का यही संदेश है कि बेहतर चारा, बेहतर दूध और बेहतर भविष्य-इन तीनों का सीधा रिश्ता है. किसान अगर आज से सही खानपान पर ध्यान दें, तो डेयरी को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ व्यवसाय बना सकते हैं.

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