कम फैट से घट रही दूध की कीमत? ये आसान उपाय बढ़ाएंगे गुणवत्ता और कमाई
दूध की मात्रा ज्यादा होने के बावजूद अगर फैट कम आ रहा है तो पशुपालकों की कमाई घट सकती है. विशेषज्ञों के बताए आसान देसी और वैज्ञानिक उपाय अपनाकर दूध का फैट और एसएनएफ बढ़ाया जा सकता है, जिससे दूध की गुणवत्ता सुधरेगी और बेहतर दाम मिलेंगे.
आज के समय में कृषि के साथ पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है. लेकिन केवल अधिक दूध उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूध की गुणवत्ता भी उतनी ही अहम होती है. डेयरी समितियां और निजी दुग्ध कंपनियां दूध की कीमत मुख्य रूप से फैट और एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) के आधार पर तय करती हैं. ऐसे में यदि दुधारू पशु अधिक दूध देने के बावजूद फैट कम दे रहा है तो पशुपालकों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती. पशु चिकित्सकों का कहना है कि संतुलित आहार, सही प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर दूध के फैट और एसएनएफ दोनों में सुधार किया जा सकता है.
केवल हरा चारा नहीं, संतुलित आहार है सबसे जरूरी
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार कई पशुपालक यह मान लेते हैं कि केवल हरा चारा खिलाने से दूध उत्पादन बढ़ जाएगा. हालांकि हरा चारा जरूरी है, लेकिन यदि इसके साथ सूखा चारा नहीं दिया जाए तो दूध में फैट की मात्रा प्रभावित हो सकती है. इसलिए हरे चारे के साथ भूसा, तूड़ा या अन्य सूखा चारा भी नियमित रूप से देना चाहिए. इससे पशु का पाचन तंत्र बेहतर रहता है और रूमेन (आमाशय) में फाइबर का संतुलन बना रहता है, जो दूध में फैट बढ़ाने के लिए जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि पशु को उसकी उम्र, नस्ल, वजन और दूध उत्पादन के अनुसार संतुलित आहार देना चाहिए. अधिक या कम पोषण दोनों ही दूध की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं.
सानी, बिनौला और मिनरल मिक्सचर से मिलेगा फायदा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार हरा चारा, सूखा चारा, दाना और खली को अलग-अलग खिलाने की बजाय सभी को मिलाकर सानी बनाकर खिलाना अधिक लाभकारी होता है. इससे पशु सभी पोषक तत्व एक साथ ग्रहण करता है और चारा आसानी से पचता है. बेहतर पाचन का सीधा असर दूध की गुणवत्ता पर दिखाई देता है. दूध में फैट बढ़ाने के लिए दाने में बिनौला या बिनौले की खल शामिल की जा सकती है. इसके साथ चने की चूरी या दाल के छिलके जैसे प्रोटीनयुक्त आहार एसएनएफ बढ़ाने में भी मदद करते हैं.
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इसके अलावा पशु के शरीर में कैल्शियम, फास्फोरस और अन्य आवश्यक खनिज तत्वों की कमी पूरी करने के लिए अच्छी गुणवत्ता का मिनरल मिक्सचर भी नियमित रूप से देना चाहिए. सामान्यतः 50 ग्राम प्रतिदिन की मात्रा उपयोगी मानी जाती है, हालांकि इसकी सही मात्रा पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए.
दूध निकालने का सही तरीका भी बढ़ाता है फैट
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार दूध निकालने की तकनीक भी दूध के फैट पर महत्वपूर्ण असर डालती है. दूध की शुरुआती धार में फैट अपेक्षाकृत कम होता है, जबकि अंतिम दूध में फैट की मात्रा अधिक होती है. इसलिए दूध निकालते समय थनों को पूरी तरह खाली करना जरूरी है. साथ ही दूध उतरने के बाद 5 से 7 मिनट के भीतर पूरा दूध निकाल लेना चाहिए, ताकि फैट युक्त अंतिम दूध भी प्राप्त हो सके.
विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं को समय पर साफ पानी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने से दूध की गुणवत्ता में लगातार सुधार होता है. यदि पशुपालक इन सरल लेकिन वैज्ञानिक उपायों को अपनाते हैं तो न केवल दूध का फैट और एसएनएफ बढ़ सकता है, बल्कि दूध का बेहतर मूल्य मिलने से उनकी आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है.