Gujarat Mandap Scheme: गुजरात के वलसाड जिले में राज्य सरकार की मंडप योजना आदिवासी किसानों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बनती जा रही है. खासकर धरमपुर तालुका और आसपास के इलाकों में करीब 20 हजार किसान अब आधुनिक मंडप (ट्रेलिस) प्रणाली पर करेला, लौकी (दूधी), टिंडोरा (गिलोरा) और परवल जैसी बेल वाली सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इस तकनीक से फसल का उत्पादन पहले की तुलना में बढ़ा है, सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर हुई है और किसानों को पूरे साल नियमित कमाई का अवसर मिल रहा है. ANI पर प्रकाशित वीडियो के अनुसार, इस योजना का लाभ लगातार अधिक किसान उठा रहे हैं.
बागवानी विभाग से मिल रही लाखों रुपये तक की सब्सिडी
ANI से बातचीत में किसानों ने बताया कि उन्हें गुजरात सरकार के बागवानी विभाग की ओर से मंडप बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. किसानों के अनुसार, इस योजना के तहत प्रति हेक्टेयर लगभग 39 हजार रुपये की सब्सिडी मिलती है. बड़े और पूरी तरह तैयार प्रोजेक्ट पर यह सहायता करीब 1.20 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. किसानों का कहना है कि मंडप तैयार करने में लगभग 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है. इसके बाद खेती से मिलने वाली आमदनी सभी खर्च निकालने के बाद हर साल करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. किसानों का कहना है कि इसी आय से उनके परिवार का खर्च आसानी से चल रहा है और सरकारी सहायता मिलने से खेती करना पहले से ज्यादा आसान हो गया है.
#WATCH गुजरात की मंडप योजना से सब्जी की खेती बनी मुनाफे का सौदा pic.twitter.com/YqShcpsMEa
और पढ़ें— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 29, 2026
मुंबई की मंडियों तक पहुंच रही वलसाड की सब्जियां
मंडप प्रणाली से तैयार होने वाली सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण अब इनकी मांग बड़े बाजारों में भी बढ़ गई है. व्यापारी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचकर सब्जियां खरीद रहे हैं. इसके बाद करेला, लौकी, टिंडोरा और परवल जैसी फसलों को मुंबई की थोक मंडियों तक भेजा जा रहा है. किसानों का कहना है कि मंडप पर बेल फैलने से फसल सुरक्षित रहती है, उत्पादन अधिक मिलता है और फसल का मौसम भी लंबा चलता है. इससे उन्हें सालभर बाजार में सब्जियां बेचने का मौका मिलता है और आय लगातार बनी रहती है.
पांच साल से मंडप खेती कर रहे किसान बोले- परिवार की आय बढ़ी
ANI से बातचीत में एक किसान ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से परवल की खेती कर रहे हैं. उन्होंने कच्चा मंडप बनाकर खेती शुरू की थी, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिला. अब वे गिलोरा (टिंडोरा), लौकी और करेला जैसी दूसरी बेल वाली सब्जियां भी इसी पद्धति से उगा रहे हैं. किसान ने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया. इस योजना की वजह से गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं और अधिक आदिवासी किसान आधुनिक बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं. मंडप योजना न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि वलसाड जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है.