टैरिफ का नहीं हुआ असर! चीन को पछाड़ अमेरिका बना भारतीय मसालों का सबसे बड़ा खरीदार

वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारतीय मसालों का सबसे बड़ा खरीदार बन गया, जबकि चीन की खरीद में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. भारत का कुल मसाला निर्यात 6.1 फीसदी घटकर 4430 मिलियन डॉलर रहा. चीन में मिर्च और जीरा उत्पादन बढ़ने से भारतीय मसालों की मांग कमजोर हुई, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ.

Kisan India
नोएडा | Published: 30 Jun, 2026 | 09:40 AM

Spice Export: अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय मसालों का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका खुद  बन गया है. इस दौरान चीन ने मिर्च और जीरा जैसे मसालों की खरीद में बड़ी कटौती कर दी, जिसके कारण वह पहले स्थान से पीछे हो गया. कई वर्षों से चीन भारतीय मसालों का सबसे बड़ा आयातक रहा था. हालांकि, कुल मिलाकर भारत के मसाला निर्यात में गिरावट दर्ज की गई.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 4430 मिलियन डॉलर मूल्य के मसालों का निर्यात किया, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 4720 मिलियन डॉलर था. यानी मसाला निर्यात के मूल्य में करीब 6.1 प्रतिशत की कमी आई है. वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारतीय मसालों का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा, हालांकि वहां निर्यात के मूल्य में कुछ गिरावट दर्ज की गई. इस अवधि में अमेरिका को 624.35 मिलियन डॉलर के मसालों का निर्यात हुआ, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 711.16 मिलियन डॉलर था. निर्यात में कमी की वजह कम शिपमेंट और अमेरिकी टैरिफ को माना जा रहा है.

अमेरिका को काली मिर्च और हल्दी का निर्यात बढ़ा

अमेरिका भारतीय काली मिर्च, हल्दी और स्पाइस ओलियोरेजिन्स (मसालों के सघन अर्क) का प्रमुख आयातक है. वर्ष 2025-26 के दौरान अमेरिका को काली मिर्च और हल्दी का निर्यात बढ़ा, जबकि स्पाइस ओलियोरेजिन्स के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई. हालांकि मात्रा (वॉल्यूम) के लिहाज से चीन अब भी भारतीय मसालों का सबसे बड़ा खरीदार रहा, लेकिन निर्यात मूल्य के आधार पर अमेरिका ने चीन को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया. चीन को भारतीय मसालों का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में तेजी से घटा है. इस दौरान चीन को 518.98 मिलियन डॉलर के मसालों का निर्यात हुआ, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 769.58 मिलियन डॉलर था. यानी निर्यात मूल्य में करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

चीन की खरीद घटने से निर्यात में बड़ी गिरावट

व्यापार के अनुसार, चीन ने मिर्च और जीरा जैसे प्रमुख भारतीय मसालों की खरीद कम कर दी है. इसकी मुख्य वजह चीन में इन मसालों का घरेलू उत्पादन  बढ़ना है. इसी कारण भारतीय मसालों की मांग वहां घटी है. गौरतलब है कि 2023-24 में चीन को भारतीय मसालों का निर्यात रिकॉर्ड 928.28 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया था और करीब 3.09 लाख टन मसाले भेजे गए थे. लेकिन पिछले दो वर्षों में चीन की खरीद घटने से निर्यात में बड़ी गिरावट देखने को मिली है.

मिर्च के निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की गिरावट

ऑल इंडिया स्पाइसेस एक्सपोर्टर्स फोरम के चेयरमैन इमैनुएल नाम्बुस्सेरिल ने कहा कि चीन में मिर्च की मांग घटने के कारण अमेरिका भारतीय मसालों का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है. उन्होंने बताया कि चीन अब अधिक तीखी किस्म की मिर्च (हीट-चिल्ली) का उत्पादन खुद करने लगा है, जिससे भारत से आयात कम हो गया है. वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारत के जीरे के निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. जीरे के निर्यात की मात्रा में 76 प्रतिशत और मूल्य में 80 प्रतिशत की कमी आई. इसी तरह मिर्च के निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत और मात्रा में 11 प्रतिशत की गिरावट रही.

चीन में 85,000 टन मिर्च का उत्पादन हुआ

मसाला कारोबारी योगेश मेहता के अनुसार, पिछले साल चीन में 85,000 से 90,000 टन मिर्च का अच्छा उत्पादन हुआ था, इसलिए उसने भारत से खरीद कम कर दी. व्यापार जगत का मानना है कि अनुकूल मौसम  और बेहतर खेती तकनीकों के कारण 2026 में भी चीन में मिर्च का उत्पादन और बढ़ सकता है, जिससे भारतीय मसालों की मांग पर असर पड़ सकता है.

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