वैश्विक बाजार में सोयाबीन की खली की मांग में भारी गिरावट से भारतीय निर्यात बाजार को जोर का झटका दिया है. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार जून महीने में सोया खली का निर्यात 69 फीसदी लुढ़क गया है. यह गिरावट भारतीय निर्यातकों के साथ ही सोयाबीन किसानों के लिए भी मुसीबत की वजह बन सकती है. अगर अगले कुछ महीने ऐसी ही स्थिति बनी रहती है तो मिलों के पास स्टॉक बढ़ेगा जो बाजार में किसानों से खरीद को घटा सकता है.
पेराई कारखानों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाला उत्पाद सोया खली कहलाता है. यह प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है. इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के साथ ही पशु आहार के साथ ही मुर्गियों और मछलियों का दाना भी तैयार किया जाता है. भारतीय खली सस्ती होने की वजह से वैश्विक बाजार में इसकी मांग अधिक रहती है. लेकिन, पश्चिम एशिया तनाव के बीच इस बार कीमतें अधिक रही हैं और सप्लाई भी प्रभावित रही है.
जून में सोया खली एक्सपोर्ट 69 फीसदी गिरा
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने सोमवार को कहा कि ऊंची कीमतों और मुख्य इंपोर्ट करने वाले बाजारों में कम मांग के चलते जून महीने में भारत का सोयाबीन की खली का एक्सपोर्ट लगभग 69 फीसदी घटकर 30,000 टन रह गया. SOPA के आंकड़ों के अनुसार जून 2025 में देश से 97,000 टन सोयाबीन मील एक्सपोर्ट किया गया था. इसकी तुलना में 67 हजार टन की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, चालू तेल विपणन वर्ष (अक्टूबर 2025-सितंबर 2026) के शुरुआती नौ महीनों के दौरान सोया खली का कुल निर्यात करीब 9 लाख टन रहा, जबकि पिछले तेल विपणन वर्ष की समान अवधि में यह 15.60 लाख टन था.
पशु, पोल्ट्री और मछली चारे में कम इस्तेमाल
एसोसिएशन ने कहा कि जून में देश में कुल 5.52 लाख टन सोयाबीन की खली का उत्पादन हुआ. इस दौरान 75,000 टन सोयाबीन मील का इस्तेमाल इंसानों के खाने के लिए और 5 लाख टन का इस्तेमाल पशु, पोल्ट्री और मछली के चारे के लिए किया गया. जबकि, महीने के आखिर में पुराना स्टॉक मिलाकर कुल स्टॉक 1.27 लाख टन मौजूद रहा. कम निर्यात ने ट्रेडर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त समय तक भंडारण और परिवहन खर्च का बोझ झेलना होगा.
भारतीय सोया खली के दाम वैश्विक बाजार में अधिक
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने पीटीआई को बताया कि भारतीय सोया खली के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लंबे समय से अधिक बने हुए हैं जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और कुछ प्रमुख बाजारों में मांग कमजोर रहने का असर भी भारतीय निर्यात पर पड़ा है.
सोयाबीन किसानों को कम मूल्य के दबाव की आशंका
एक्सपर्ट का कहना है कि मिलों के पास सोयाबीन पेराई के लिए पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और तेल निकालने के बाद खली भी स्टॉक में है. अगर आने वाले कुछ महीनों में सोया खली का निर्यात नहीं बढ़ता है तो घरेलू स्तर पर भी कीमतों में गिरावट की आशंका है. ऐसी स्थिति में सोयाबीन किसानों को उपज के मूल्य में दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उपज खरीद में भी दबाव की स्थिति बनने का खतरा है. वहीं, इस बार खरीफ सीजन में सोयाबीन का रकबा तेजी से बढ़ता दिख रहा है.