पशुपालकों के लिए अलर्ट, गाय-भैंस में पानी और नमक की कमी से घट सकता है दूध उत्पादन.. करें ये काम
बिहार सरकार के पशुपालन निदेशालय ने अप्रैल की बढ़ती गर्मी को देखते हुए पशुपालकों को जरूरी सलाह दी है. विभाग के अनुसार इस मौसम में पशुओं में पानी और लवण की कमी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन घटने की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए दोपहर में पशुओं को छाया और हवादार जगह पर रखना जरूरी बताया गया है.
Animal Husbandry: बिहार में अप्रैल की गर्मी अब धीरे-धीरे तेज होने लगी है और इसका असर सिर्फ लोगों पर ही नहीं, पशुओं पर भी साफ दिखाई देता है. यही वजह है कि बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के तहत पशुपालन निदेशालय ने पशुपालकों के लिए अहम सलाह जारी की है. विभाग का कहना है कि इस महीने अधिक तापमान की वजह से पशुओं में पानी और लवण (नमक) की कमी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन घटने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो पशुओं की सेहत और पशुपालकों की कमाई दोनों प्रभावित हो सकती हैं. इसलिए सरकार ने आसान और जरूरी उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर पशुओं को गर्मी से सुरक्षित रखा जा सकता है.
अप्रैल की गर्मी में पशुओं पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर
पशुपालन निदेशालय के अनुसार अप्रैल में तापमान बढ़ने के साथ पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या तेजी से बढ़ती है. गर्मी ज्यादा होने पर पशु कम चारा खाते हैं, ज्यादा पानी पीते हैं और सुस्त हो जाते हैं. इसका सीधा असर उनके दूध देने की क्षमता पर पड़ता है. तो जब पशु गर्मी से परेशान होते हैं, तो उनका शरीर सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता. इससे दूध कम हो जाता है और कई बार पशु बीमार भी पड़ सकते हैं. खासकर दुधारू गाय और भैंसों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. इसलिए विभाग ने कहा है कि अप्रैल में पशुओं की दिनचर्या और रहने की जगह पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.
पानी और लवण की कमी से बचाना है सबसे जरूरी
सरकार की सलाह के मुताबिक इस मौसम में पशुओं के शरीर में पानी और जरूरी लवण की कमी जल्दी हो सकती है. इससे कमजोरी, थकान और भूख कम लगने जैसी परेशानी बढ़ती है. पशुपालकों को चाहिए कि वे पशुओं को दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी दें. पानी की टंकी या बर्तन हमेशा भरे रहें. साथ ही चारे में मिनरल मिक्सचर और नमक की उचित मात्रा जरूर दें, ताकि शरीर में जरूरी तत्वों की कमी न हो. ऐसे में जितना ध्यान गर्मी में इंसान को पानी पिलाने पर दिया जाता है, उतना ही ध्यान पशुओं के लिए भी जरूरी है. इससे पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन पर असर कम पड़ेगा.
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दोपहर में छाया और हवादार जगह पर रखें पशु
पशुपालन विभाग ने साफ कहा है कि दोपहर के समय पशुओं को खुली धूप में बिल्कुल न रखें. तेज धूप और गर्म हवा पशुओं को जल्दी थका देती है. इसलिए पशुओं को छाया वाले और हवादार स्थान में बांधना सबसे जरूरी है. अगर शेड है तो उसमें हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. गांवों में पेड़ की छांव या टिन शेड के नीचे भी पशुओं को रखा जा सकता है, लेकिन वहां हवा का रास्ता खुला होना चाहिए. अगर संभव हो तो दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच पशुओं को आराम करने दें. इससे उनका शरीर ठंडा रहेगा और गर्मी का असर कम होगा.
थोड़ी सावधानी से दूध और कमाई दोनों बचेंगे
बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग का कहना है कि गर्मी में छोटी-छोटी सावधानियां पशुपालकों के लिए बड़ा फायदा दे सकती हैं. अगर पशु गर्मी से बचे रहेंगे तो उनकी भूख ठीक रहेगी, शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और दूध उत्पादन भी सामान्य बना रहेगा. इसका सीधा फायदा पशुपालकों की आमदनी पर पड़ेगा. दूध कम होने से जहां रोज की कमाई घटती है, वहीं पशु बीमार पड़ने पर इलाज का खर्च भी बढ़ जाता है. अप्रैल का महीना पशुओं के लिए देखभाल का महीना है. इस समय अगर पशुपालक छाया, पानी, नमक और हवादार जगह का ध्यान रख लें, तो गर्मी के बावजूद पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन अच्छा बना रहेगा. बिहार सरकार की यह सलाह गांव-गांव के पशुपालकों के लिए बेहद काम की है और इसे अपनाकर नुकसान से बचा जा सकता है.