Animal Care Tips: भीषण गर्मी में गाय-भैंस कम खा रही हैं? ये देसी उपाय बढ़ाएंगे भूख और दूध

गर्मी बढ़ते ही कई पशु चारा कम खाने लगते हैं, जिससे दूध उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. पशु चिकित्सकों के अनुसार, ठंडी जगह, ताजा हरा चारा और भरपूर पानी देने से पशुओं की भूख बढ़ाई जा सकती है. सही देखभाल से लू से बचाव होगा और डेयरी का नुकसान भी कम रहेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 Apr, 2026 | 11:30 PM

Animal Care Tips: भीषण गर्मी शुरू होते ही पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि पशु अचानक चारा कम खाने लगते हैं. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे गाय-भैंस का शरीर भी गर्म होने लगता है, जिसका सीधा असर उनकी भूख और दूध उत्पादन पर पड़ता है. कई बार पशु सुस्त हो जाते हैं, बार-बार पानी पीते हैं और हरा चारा भी छोड़ देते हैं. यही छोटी लापरवाही बाद में बड़े नुकसान की वजह बन जाती है. KVK के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, अगर गर्मी के दिनों में पशुओं के रहने की जगह, पानी और चारे पर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो उनकी भूख दोबारा बढ़ाई जा सकती है और दूध उत्पादन को भी गिरने से बचाया जा सकता है. सही देखभाल से पशु लू से सुरक्षित रहते हैं और डेयरी का मुनाफा भी बना रहता है.

गर्मी में क्यों कम हो जाती है पशुओं की भूख

गर्मी के मौसम में तेज धूप, गर्म हवाएं और टिन शेड की तपन पशुओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है. जब पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ता है, तो उनका पाचन धीमा हो जाता  है. इसी वजह से वे चारा कम खाने लगते हैं. कुंवर घनश्याम बताते हैं कि जब पशु ज्यादा गर्मी महसूस करते हैं, तो वे खाने से ज्यादा ठंडी जगह ढूंढते हैं. अगर उन्हें बंधने वाली जगह पर हवा नहीं मिलती, तो यह समस्या और बढ़ जाती है. खासकर विदेशी नस्ल की गायों और ज्यादा दूध देने वाले पशुओं पर गर्मी का असर जल्दी दिखाई देता है. ऐसी स्थिति में पशुपालकों को सुबह जल्दी और शाम ढलने के बाद चारा देना चाहिए. इस समय मौसम थोड़ा ठंडा रहता है, इसलिए पशु आराम से चारा खाते हैं. दिन की तेज धूप में चारा देने से वे अक्सर कम रुचि दिखाते हैं.

बॉडी टेंपरेचर कंट्रोल रखना है सबसे जरूरी

गर्मी में पशुओं की भूख बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है उनका शरीर ठंडा रखना. KVK के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, हर 2 से 3 दिन में गाय-भैंस को अच्छी तरह नहलाना चाहिए. इससे शरीर का तापमान सामान्य रहता है और पशु राहत महसूस करते हैं. अगर संभव हो तो पशुशाला में पंखा, कूलर या फॉगर जरूर लगाएं. फॉगर ऊपर से हल्का पानी छोड़कर आसपास का माहौल ठंडा रखता है, जिससे पशुओं को गर्मी कम लगती है. ध्यान रखें कि जहां पशु बंधे हों, वहां सीधी धूप न आए. टिन शेड के नीचे अगर गर्मी ज्यादा होती है तो ऊपर घास-फूस या सफेद कवर डालकर तापमान कम किया जा सकता है. हवा का सही इंतजाम होने से पशु ज्यादा आराम महसूस करते हैं और उनकी भूख भी बेहतर होती है.

ताजा हरा चारा और पानी है सबसे बड़ा इलाज

गर्मी में पशुओं को सूखा चारा  कम और ताजा हरा चारा ज्यादा देना चाहिए. बरसीम, बाजरा, नेपियर या हरी मक्का जैसे चारे में पानी की मात्रा अच्छी होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखती है. कुंवर घनश्याम सलाह देते हैं कि चारे को काटने के तुरंत बाद खिलाएं. ज्यादा देर तक पड़ा या सूखा चारा पशु कम पसंद करते हैं. हरे चारे में थोड़ा मिनरल मिक्स और नमक मिलाकर देने से स्वाद बढ़ता है, जिससे पशु ज्यादा खाते हैं. पानी की बात करें तो हर पशु को 24 घंटे में कम से कम 40 लीटर साफ और ठंडा पानी जरूर मिलना चाहिए. पानी की कमी होते ही पशु चारा छोड़ना शुरू कर देते हैं और दूध भी घटने लगता है. इसलिए दिन में कई बार पानी बदलकर ताजा पानी देना जरूरी है.

दूध उत्पादन बचाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीका

गर्मी का सबसे ज्यादा असर दूध देने वाले पशुओं पर पड़ता है. जब पशु चारा कम खाते हैं, तो दूध अपने आप कम हो जाता है. इसलिए गर्मी में उनका खान-पान और आराम दोनों बेहतर रखना जरूरी है. सुबह जल्दी हरा चारा, दोपहर में पानी और हल्का सूखा चारा, जबकि शाम को फिर ताजा हरा चारा देना अच्छा माना जाता है. इसके साथ मिनरल मिक्स, गुड़-पानी और नमक का घोल भी फायदेमंद रहता है. KVK के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, अगर पशुपालक गर्मी में सिर्फ ठंडी जगह, ताजा चारा और पर्याप्त पानी का ध्यान रखें, तो पशुओं की भूख बढ़ जाती है और दूध उत्पादन में गिरावट  नहीं आती.

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Published: 3 Apr, 2026 | 11:30 PM
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