पशु क्रूरता पर सरकार ने बढ़ाई सख्ती, पशु संसाधन विभाग का बड़ा फैसला.. हर जिले में निगरानी समितियों का गठन

पशुओं के साथ मारपीट, भूखा रखना या इलाज में लापरवाही रोकने के लिए बिहार सरकार ने हर जिले में विशेष समिति बनाई है. यह समिति शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई करेगी. सरकारी अधिकारियों के साथ गैर सरकारी सदस्य भी शामिल हैं, जिससे पशु सुरक्षा, जागरूकता और त्वरित मदद का काम और मजबूत होगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 Apr, 2026 | 12:11 PM

Animal Cruelty: कई बार सड़क, बाजार, खेत या घरों के आसपास पशुओं के साथ मारपीट, भूखा रखना, ज्यादा बोझ लादना या इलाज न कराना जैसी घटनाएं सामने आती हैं. ऐसी लापरवाही सिर्फ अमानवीय ही नहीं, बल्कि कानूनन गलत भी है. इसी को रोकने के लिए बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग लगातार काम कर रहा है. विभाग के अनुसार राज्य के हर जिले में पशुओं पर होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए जिला स्तर पर विशेष समिति बनाई गई है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पशुओं के साथ किसी भी तरह की मारपीट, लापरवाही या शोषण न हो और दोषियों पर समय रहते कार्रवाई हो. विभाग की पशु कल्याण योजनाओं में यह काम प्रमुख रूप से शामिल है.

हर जिले में बनी पशु क्रूरता निवारण समिति

बिहार सरकार की ओर से राज्य के प्रत्येक जिले में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में पशु क्रूरता निवारण समिति बनाई गई है. इस समिति के सचिव जिला पशुपालन पदाधिकारी होते हैं. इसका मुख्य काम जिले में पशुओं के साथ हो रही क्रूरता की शिकायतों पर नजर रखना, जांच कराना और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करवाना है. यह समिति सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पशु कल्याण से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाती है. अगर कहीं पशुओं को पीटा जा रहा है, भूखा रखा जा रहा है, बीमार होने पर इलाज नहीं कराया जा रहा है या उन पर जरूरत से ज्यादा बोझ डाला जा रहा है, तो समिति ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर सकती है.

5 साल तक काम करेगी समिति

इस समिति का कार्यकाल 5 साल रखा गया है, ताकि लंबे समय तक लगातार निगरानी और सुधार  का काम चलता रहे. खास बात यह है कि इसमें सिर्फ सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि चार गैर सरकारी सदस्य भी शामिल किए जाते हैं. गैर सरकारी सदस्यों के शामिल होने से आम लोगों की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचती है. पशु प्रेमी, समाजसेवी और पशु कल्याण से जुड़े लोग अपनी जानकारी और अनुभव के आधार पर बेहतर सुझाव दे सकते हैं. इससे गांव और शहर दोनों जगह पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद मिलती है.

किन मामलों को माना जाता है पशु क्रूरता

पशु को बेवजह मारना, भूखा-प्यासा रखना, घायल होने पर इलाज  न कराना, ज्यादा वजन ढोने पर मजबूर करना, तंग जगह में बांधना या तेज गर्मी-सर्दी में खुले में छोड़ देना पशु क्रूरता मानी जाती है. इसके अलावा दूध देने वाले पशुओं, घोड़े, बैल, बकरी, कुत्ते या किसी भी पालतू जानवर के साथ लापरवाही भी इसी दायरे में आती है. विभाग का कहना है कि पशु भी जीवित प्राणी हैं और उनकी सुरक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. पशु कल्याण और क्रूरता रोकथाम का काम विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है.

जागरूकता और शिकायत से रुकेगी क्रूरता

पशुओं पर क्रूरता रोकने में सिर्फ सरकार ही नहीं, आम लोगों की भूमिका भी बहुत जरूरी है. अगर कहीं किसी पशु के साथ गलत व्यवहार होता दिखे तो तुरंत स्थानीय प्रशासन, जिला पशुपालन कार्यालय या पुलिस को जानकारी देनी चाहिए. जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी जल्दी पशु को राहत  मिल सकती है. गांवों में खासतौर पर पशुपालकों को यह समझाने की जरूरत है कि पशु सिर्फ कमाई का साधन नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी हैं. सही देखभाल, समय पर चारा-पानी और इलाज देने से न सिर्फ पशु स्वस्थ रहते हैं, बल्कि पशुपालकों की आय भी बेहतर होती है.

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