बरसात में कराएं नस्ल सुधार, 90 फीसदी तक बछिया की संभावना से बढ़ेगा दूध का मुनाफा!

बरसात का मौसम पशुओं की नस्ल सुधार के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. हरे चारे से पोषण सुधरता है, सही हीट पीरियड में कृत्रिम गर्भाधान की सफलता बढ़ती है और सेक्स-सॉर्टेड सीमन से अधिक बछिया मिलने की संभावना डेयरी किसानों की आय बढ़ा सकती है.

नोएडा | Published: 16 Aug, 2026 | 11:40 AM

Monsoon Cattle Breeding: बरसात का मौसम गाय और भैंसों की नस्ल सुधार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. इस दौरान हरा चारा भरपूर मिलने से पशुओं का पोषण बेहतर होता है, जिससे कृत्रिम गर्भाधान की सफलता और स्वस्थ बछिया मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

पशुपालन आज किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है. बदलते समय में खेती के लिए बैलों की उपयोगिता कम हुई है, जबकि दूध और दुग्ध उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में अधिक दूध देने वाली गाय और भैंस तैयार करने के लिए नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात में स्वस्थ पशुओं का सही समय पर कृत्रिम गर्भाधान कराने से भविष्य की पीढ़ी अधिक उत्पादक और मजबूत बन सकती है.

बरसात का मौसम क्यों है सबसे उपयुक्त?

पशु चिकित्सक घनश्याम कुंवर के अनुसार, मॉनसून के दौरान  तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है और खेतों में हरा चारा आसानी से उपलब्ध हो जाता है. हरे चारे में मौजूद पोषक तत्व पशुओं की शारीरिक स्थिति सुधारने, प्रजनन क्षमता बढ़ाने और गर्भधारण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद करते हैं. यही कारण है कि इस मौसम में नस्ल सुधार के प्रयास अधिक सफल माने जाते हैं.

बेहतर सीमन से तैयार होगी उच्च उत्पादक नस्ल

विशेषज्ञ का कहना है कि कृत्रिम गर्भाधान  में अच्छी आनुवंशिक क्षमता वाले सांड के सीमन का उपयोग करना चाहिए. इससे जन्म लेने वाली अगली पीढ़ी में अधिक दूध उत्पादन, बेहतर शारीरिक विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसे गुण मिलने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि केवल उच्च गुणवत्ता वाला सीमन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पशु का पूरी तरह स्वस्थ होना भी उतना ही आवश्यक है.

सेक्स-सॉर्टेड सीमन से बढ़ेगी बछिया मिलने की संभावना

नस्ल सुधार के लिए सेक्स-सॉर्टेड सीमन  एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है. इस तकनीक से लगभग 90 प्रतिशत तक बछिया जन्म लेने की संभावना रहती है, जिससे भविष्य में दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ सकती है. सरकार ने इस सुविधा को अधिक सुलभ बनाने के लिए इसका शुल्क भी कम कर दिया है. अब पशुपालक नाममात्र की लागत पर इस तकनीक का लाभ उठा सकते हैं और पशुपालन को अधिक लाभकारी बना सकते हैं.

सही हीट पीरियड और संतुलित आहार है सफलता की कुंजी

पशु चिकित्सक घनश्याम कुंवर के अनुसार, नस्ल सुधार की सफलता  चार बातों पर निर्भर करती है- पशु का स्वस्थ होना, हीट पीरियड की सही पहचान, संतुलित पोषण और समय पर कृत्रिम गर्भाधान. बरसात में हरा चारा, मिनरल मिश्रण और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इसलिए पशुपालकों को किसी भी प्रकार का गर्भाधान कराने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान मानसून के दौरान वैज्ञानिक तरीके से नस्ल सुधार अपनाते हैं, तो आने वाले वर्षों में दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालन से होने वाली आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है.

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