मॉनसून में बार-बार फट रहा दूध? ये आसान देसी उपाय बचाएगा आपका नुकसान

बरसात में बढ़ी नमी के कारण दूध जल्दी फटने की समस्या आम हो जाती है. पशु चिकित्सकों के अनुसार, समय पर उबालना, साफ बर्तनों का उपयोग, सही भंडारण और पशुओं की स्वच्छता का ध्यान रखने से दूध लंबे समय तक ताजा रखा जा सकता है और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है.

नोएडा | Published: 26 Jul, 2026 | 06:33 PM

Monsoon Milk Tips: मॉनसून का मौसम जहां हरियाली और राहत लेकर आता है, वहीं पशुपालकों के लिए कई चुनौतियां भी साथ लाता है. बारिश के दौरान बढ़ी हुई नमी और तापमान में बदलाव के कारण दूध जल्दी खराब होने या फटने की समस्या आम हो जाती है. इससे न केवल घरेलू उपयोग प्रभावित होता है, बल्कि दूध बेचने वाले पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. पशु चिकित्सकों के अनुसार, यदि दूध निकालने से लेकर उसके भंडारण तक कुछ जरूरी सावधानियां अपनाई जाएं तो इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.

मॉनसून में क्यों जल्दी फट जाता है दूध?

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, बरसात के मौसम  में वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. यदि दूध निकालने के बाद उसे समय पर उबाला नहीं जाए या गंदे बर्तन में रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. यही कारण है कि दूध सामान्य दिनों की तुलना में जल्दी खराब या फट जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि दूध निकालने के तुरंत बाद उसे साफ कपड़े या छलनी से छानकर उबाल देना चाहिए. इससे बैक्टीरिया की संख्या कम होती है और दूध अधिक समय तक सुरक्षित रहता है.

दूध निकालते समय रखें साफ-सफाई का पूरा ध्यान

दूध की गुणवत्ता  बनाए रखने के लिए स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, दूध दुहने से पहले गाय या भैंस के थनों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए. दूध निकालने वाले व्यक्ति के हाथ भी पूरी तरह साफ होने चाहिए. इसके अलावा जिस बर्तन में दूध निकाला जा रहा है, वह साफ और पूरी तरह सूखा होना चाहिए. बर्तन में बची नमी, गंदगी या पुराने दूध के अवशेष भी दूध खराब होने का कारण बन सकते हैं. इसलिए हर बार साफ बर्तनों का ही उपयोग करें.

ऐसे रखें दूध को सुरक्षित, लंबे समय तक रहेगा ताजा

दूध को उबालने के बाद जल्द से जल्द ठंडा कर लेना चाहिए. यदि घर में फ्रिज उपलब्ध है तो दूध ठंडा होने के बाद तुरंत उसमें रख दें. जिन स्थानों पर फ्रिज की सुविधा नहीं है, वहां दूध वाले बर्तन  को ठंडे पानी से भरे बड़े बर्तन में रखकर उसका तापमान कम किया जा सकता है. कुछ लोग आपात स्थिति में दूध उबालते समय बहुत कम मात्रा में खाने का सोडा मिलाने का घरेलू तरीका अपनाते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे नियमित रूप से अपनाने की सलाह नहीं देते. उनका कहना है कि सबसे सुरक्षित तरीका समय पर उबालना, स्वच्छता बनाए रखना और दूध को गर्मी व नमी से बचाकर रखना है.

पशु का स्वास्थ्य भी है दूध की गुणवत्ता की कुंजी

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, मॉनसून में गाय और भैंस के थनों  में संक्रमण (मास्टाइटिस) का खतरा बढ़ जाता है. यदि पशु बीमार है या थनों में संक्रमण है, तो दूध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उसके जल्दी खराब होने की संभावना भी बढ़ जाती है. इसलिए पशुपालकों को पशुओं के खान-पान, साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. किसी भी प्रकार के संक्रमण या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए. स्वस्थ पशु से प्राप्त दूध अधिक समय तक सुरक्षित रहता है, उसकी गुणवत्ता बेहतर होती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान की संभावना भी कम हो जाती है.

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