नेपियर-सूडान हरे चारे का कमाल, कम खर्च में दुधारू पशु दे रहे दोगुना दूध रोजाना
दुधारू पशुओं को सही पोषण देने से दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. खास हरे चारे के उपयोग से पशुओं की सेहत सुधरती है और दूध की मात्रा में बढ़ोतरी होती है. कम लागत में उगाया जाने वाला यह चारा पशुपालकों के लिए लाभदायक विकल्प बनता जा रहा है.
Milk Production: दूध बढ़ाने के लिए कई पशुपालक महंगे दाने और सप्लीमेंट पर पैसा खर्च करते हैं, लेकिन मुनाफा उतना नहीं मिल पाता. ऐसे में एक देसी और सस्ता तरीका सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है. एक खास किस्म के हरे चारे के इस्तेमाल से दूध उत्पादन दोगुना तक बढ़ गया है. इतना ही नहीं, पशुओं की सेहत भी पहले से बेहतर हो रही है और दवा का खर्च भी कम हुआ है.
नेपियर-सूडान चारे से बढ़ा दूध उत्पादन
दुधारू पशुओं को नेपियर और सूडान किस्म का हरा चारा खिलाया जा रहा है. पहले जहां रोज करीब 150 लीटर दूध मिलता था, वहीं अब उत्पादन बढ़कर लगभग 300 लीटर प्रतिदिन हो गया है. हरे चारे के नियमित इस्तेमाल से दूध की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. इससे यह साफ हुआ कि सही पोषण मिलने पर पशु अपनी पूरी क्षमता से दूध दे सकते हैं.
पशुओं की सेहत में भी सुधार
हरा चारा दुधारू पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें फाइबर, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. इसे नियमित खिलाने से पशुओं की पाचन शक्ति मजबूत होती है और उनका शरीर स्वस्थ रहता है. स्वस्थ पशु ज्यादा सक्रिय रहते हैं और बेहतर दूध उत्पादन करते हैं. दूध की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलता है. जब पशु कम बीमार पड़ते हैं, तो दवाइयों और इलाज पर होने वाला खर्च अपने आप कम हो जाता है. इससे पशुपालकों की बचत बढ़ती है और पशुपालन का काम ज्यादा लाभदायक बन जाता है.
कम लागत में ज्यादा फायदा
इस चारे की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे खाली जमीन पर आसानी से उगाया जा सकता है. एक बार लगाने के बाद यह कई बार कटाई देता है. जब पौधा 6 से 8 फीट लंबा हो जाता है, तब उसकी कटाई की जाती है. एक पौधे से चार बार तक चारा लिया जा सकता है. कटाई के बाद जड़ का हिस्सा दोबारा रोपकर फिर से उत्पादन शुरू किया जा सकता है. इससे बार-बार बीज या ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती.
दूसरे पशुपालकों के लिए बना मिसाल
इस तकनीक को अपनाने से न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ा है, बल्कि चारे की कमी की समस्या भी खत्म हुई है. अब अन्य पशुपालक भी इस तरीके को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. कम लागत, आसान खेती और बेहतर परिणाम-इन तीन वजहों से यह हरा चारा पशुपालन के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. अगर पशुपालक अपनी खाली जमीन का सही उपयोग करें, तो वे भी कम खर्च में ज्यादा दूध उत्पादन कर सकते हैं. कुल मिलाकर, सही चारा और सही देखभाल से दुधारू पशुओं की सेहत सुधरती है, दूध बढ़ता है और मुनाफा भी दोगुना हो सकता है.