गर्मी में भी भरपूर दूध और कम बीमारी, साहीवाल गाय क्यों बन रही डेयरी फार्मर्स की पहली पसंद

डेयरी बिजनेस में साहीवाल गाय किसानों के लिए शानदार विकल्प बन रही है. यह नस्ल कम खर्च में ज्यादा दूध देती है, बीमार कम पड़ती है और गर्म मौसम में भी अच्छा उत्पादन बनाए रखती है. दूध में बेहतर फैट होने से बाजार में दाम भी अच्छे मिलते हैं, जिससे किसानों की कमाई तेजी से बढ़ सकती है.

नोएडा | Updated On: 13 Apr, 2026 | 08:13 PM

Sahiwal Cow: डेयरी बिजनेस में आज किसान ऐसी नस्ल की तलाश करते हैं, जो ज्यादा दूध दे, कम बीमार पड़े और हर मौसम में अच्छा प्रदर्शन करे. इसी वजह से साहिवाल गाय तेजी से किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, यह देसी नस्ल डेयरी फार्मिंग के लिए सबसे भरोसेमंद मानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह गर्म मौसम को आसानी से सह लेती है, कम देखभाल में भी अच्छा दूध देती है और इसके दूध में फैट भी बेहतर होता है. यही वजह है कि छोटे से लेकर बड़े डेयरी किसान तक इसे मुनाफे वाली नस्ल मान रहे हैं.

एक ब्यांत में 2000 से 3000 लीटर तक दूध

साहिवाल गाय की सबसे बड़ी ताकत इसकी हाई मिल्क प्रोडक्शन क्षमता  है. कुंवर घनश्याम के अनुसार सही देखभाल और संतुलित आहार मिलने पर यह गाय एक ब्यांत में 2000 से 3000 लीटर तक दूध दे सकती है. यही वजह है कि डेयरी किसान इसे लंबे समय के मुनाफे के लिए बेहतर विकल्प मानते हैं. रोजाना दूध की अच्छी मात्रा मिलने से किसान दूध डेयरी, घी, पनीर और मावा बनाकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं. जो किसान छोटे स्तर से डेयरी शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह नस्ल सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है.

दूध में अच्छा फैट, बाजार में ज्यादा डिमांड

इस गाय के दूध की दूसरी बड़ी खासियत है इसका बेहतर फैट प्रतिशत. आमतौर पर साहिवाल गाय  के दूध में 4 से 5 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है. ज्यादा फैट होने की वजह से इसका दूध बाजार में अच्छी कीमत दिलाता है. खासकर घी, मक्खन, मावा और मिठाई बनाने वाले लोग ऐसे दूध को ज्यादा पसंद करते हैं. इसका सीधा फायदा किसानों को मिलता है, क्योंकि फैट के हिसाब से दूध का दाम बढ़ जाता है. यानी कम गायों से भी ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है.

कम बीमार, कम खर्च और हर मौसम में फिट

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम बताते हैं कि साहिवाल गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता  काफी मजबूत होती है. दूसरी कई नस्लों की तुलना में इसे बीमारियां कम लगती हैं, जिससे दवा और इलाज का खर्च कम आता है. यह गाय गर्मी वाले इलाकों में भी आसानी से रह लेती है. तेज धूप और गर्म मौसम का इसके दूध उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता. इसी वजह से उत्तर भारत और गर्म क्षेत्रों के किसानों के लिए यह नस्ल बहुत फायदेमंद मानी जाती है. कम खर्च में अच्छी देखभाल के साथ यह लंबे समय तक बेहतर उत्पादन देती रहती है.

बछड़ों से भी होगी अतिरिक्त कमाई

साहिवाल गाय सिर्फ दूध से ही नहीं, बल्कि इसके बछड़ों से भी अतिरिक्त आय का मौका देती  है. इसके बछड़े मजबूत और अच्छी नस्ल के माने जाते हैं, इसलिए बाजार में इनकी मांग बनी रहती है. किसान इन्हें बेचकर अलग से कमाई कर सकते हैं. यही कारण है कि इसे सफेद सोना भी कहा जाता है. T0TOअगर किसान सही समय पर टीकाकरण, हरा चारा, सूखा चारा और मिनरल मिक्सचर का ध्यान रखें, तो यह नस्ल लंबे समय तक शानदार रिटर्न देती है. डेयरी बिजनेस में कम खर्च, अच्छा दूध और मजबूत नस्ल की तलाश कर रहे किसानों के लिए साहिवाल गाय एक शानदार और भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आई है.

Published: 13 Apr, 2026 | 10:22 PM

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