इंसानों की तरह ही गायों और भैंसों में भी कई तरह की जानलेवा बीमारियां होने का खतरा लगा रहता है. ऐसी ही एक जानलेवा बीमारी है लंपी रोग. ये एक खतरनाक बीमारी है, जो खासकर गाय और भैंस में होती है. ये एक वायरस जनित रोग है, इसलिए मच्छर, मक्खी और दूसरे कीड़े इसे फैलने में मदद करते हैं. बता दें कि इस रोग में गायों या भैंसों के शरीर पर गांठें निकल आती हैं, बुखार आ जाता है और वे दूध देना कम कर देती है. ऐसे में न केवल पशुओं को दिकक्त होगी, बल्कि किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ता है. पशुपालकों की इस समस्या का समाधान निकालने के लिए बिहार पशु निदेशालय एवं मत्स्य विभाग ने जरूरी एडवाइजरी जारी की हैं, जिसमें लंपी रोग से बचाव के लिए पारंपरिक तरीके बताए गए हैं.
बाहरी घाव के लिए करें ये उपाय
अगर गायों या भैंसों में लम्पी त्वचा रोग के कारण बाहरी घाव हो गए हैं तो पशुपालक पारंपरिक विधि से औषधि तैयार कर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप सबसे पहले 1 मुट्ठी अरारोट के पत्ते , 2 कली लहसुन, 1 मुट्ठी नीम के पत्ते, 500 मिलीलीटर नारियल या तिल का तेल, 20 ग्राम हल्दी पाउडर, 1 मुट्ठी मेहंदी के पत्ते और 1 मुट्ठी तुलसी के पत्ते ले लें. इसके बाद इकट्ठा की गई सभी चीजों को 500 मिलीलीटर नारियल या तिल के तेल के साथ उबालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें. एक बार ये घोल ठंडा हो जाए तो घाव को साफ करके सीधे घाव पर इस घोल को लगाएं. इसके अलावा अगर मग्गेट्स हो गए हैं तो पहले ही दिन सीताफल (शरीफा) के पत्तों का पेस्ट या कपूर मिला हुआ नारियल का तेल पशुओं के शरीर पर लगाएं.
लहसुन और गुड़ के पेस्ट का करें इस्तेमाल
काली मिर्च और नमक का पेस्ट करेगा असर
किसान चाहें को रसोई से 10 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम नमक और 10 पान के पत्ते लें. इसके बाद इस सबको मिलाकर एक पेस्ट बना लें और गुड़ के साथ मिलाें. जब पेस्ट तैयार हो जाए तो पहले दिन हर 3 घंटे में एक खुराक दें. दूसरे दिन से दो सप्ताह तक हर दिन तीन खुराक दें.