Indigenous Cows: डेयरी बिजनेस में नुकसान का डर खत्म, इन देसी नस्ल की गायों से होगी पक्की कमाई!
अगर आप दूध का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं लेकिन ज्यादा खर्च और नुकसान से डरते हैं, तो कुछ खास देसी नस्ल की गायें आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं. ये गायें कम देखभाल में भी रोज अच्छा दूध देती हैं. बाजार में इनके दूध की मांग भी अच्छी रहती है.
Dairy Farming: अगर आप दूध का काम शुरू करना चाहते हैं लेकिन ज्यादा खर्च और नुकसान का डर आपको पीछे खींच रहा है, तो अब चिंता छोड़ दीजिए. कुछ खास देसी नस्ल की गायें ऐसी हैं जो कम देखभाल और कम खुराक में भी अच्छा दूध देती हैं. यही वजह है कि छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए ये नस्लें कम जोखिम और ज्यादा कमाई का रास्ता बन रही हैं.
कम खर्च में ज्यादा मुनाफा
डेयरी बिजनेस में सबसे बड़ी चिंता होती है चारे, दवा और देखभाल का खर्च. लेकिन देसी नस्ल की गायों की खास बात यह है कि ये कम खुराक में भी स्वस्थ रहती हैं. इन पर मौसमी बीमारियों का असर भी कम पड़ता है. यही कारण है कि इनका पालन करना आसान और सस्ता माना जाता है. सामान्य देखभाल, साफ पानी और संतुलित आहार से ये रोजाना 8 से 10 लीटर तक दूध दे सकती हैं. छोटे किसानों और नए डेयरी कारोबारियों के लिए यह एक सुरक्षित शुरुआत हो सकती है.
गिर नस्ल- बढ़िया दूध और अच्छी कीमत
गिर नस्ल की गाय को डेयरी के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसका शरीर धब्बेदार होता है और सींग मुड़ी हुई होती हैं, जिससे इसे पहचानना आसान होता है. यह गाय रोज 8 से 10 लीटर तक दूध दे सकती है. इसके दूध की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है, इसलिए बाजार में इसकी कीमत भी ज्यादा मिलती है. कई जगह इसका दूध ऊंचे दाम पर बिकता है, जिससे पशुपालकों की आमदनी बढ़ती है.
लाल सिंधी और थारपारकर- आसान पालन, अच्छा उत्पादन
लाल रंग और चौड़े माथे वाली लाल सिंधी गाय भी डेयरी के लिए बढ़िया मानी जाती है. यह भी रोजाना 8 से 10 लीटर तक दूध दे सकती है. इसकी खासियत यह है कि इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. थारपारकर नस्ल की गाय गर्म और सूखे इलाके में भी आसानी से रह लेती है. इसका रंग सफेद, खाकी या हल्का भूरा होता है. कम चारे में भी यह अच्छी दूध देने की क्षमता रखती है. इसलिए यह उन इलाकों के लिए बेहतर है जहां हरा चारा कम मिलता है.
साहीवाल नस्ल- मजबूत शरीर, भरोसेमंद दूध
साहीवाल नस्ल की गाय का रंग लाल होता है और शरीर थोड़ा भारी होता है. इसका माथा लंबा और सींग छोटे होते हैं. यह नस्ल भी रोज 8 से 10 लीटर तक दूध देने में सक्षम है. यह गाय मजबूत होती है और बदलते मौसम को सहन कर लेती है. इसलिए जिन लोगों को डेयरी का ज्यादा अनुभव नहीं है, उनके लिए यह नस्ल सुरक्षित विकल्प मानी जाती है.
डेयरी शुरू करने वालों के लिए क्यों फायदेमंद?
देसी नस्ल की इन गायों की सबसे बड़ी खासियत है कम खर्च, कम बीमारी और स्थिर दूध उत्पादन. इनके दूध की बाजार में अच्छी मांग रहती है. अगर सही देखभाल, साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण किया जाए, तो डेयरी का काम धीरे-धीरे मजबूत कमाई का जरिया बन सकता है. अगर आप कम जोखिम में दूध का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो ये देसी नस्ल की गायें आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं. सही नस्ल का चुनाव ही डेयरी में सफलता की पहली सीढ़ी है.