यूपी की 7,500 गोशालाएं बनेंगी रोजगार का हब, 3 लाख युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई पहल शुरू की है. इस योजना के तहत युवाओं, किसानों और महिला समूहों को नए अवसर मिलेंगे. साथ ही कृषि और पशुपालन से जुड़े उत्पादों के जरिए गांवों में आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा.

नोएडा | Updated On: 29 Jun, 2026 | 07:18 PM

Cow Shelters: उत्तर प्रदेश सरकार ने गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य की 7,500 से अधिक गोशालाओं को पंचगव्य क्लस्टर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है. इस पहल का उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना, गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और गो-आधारित उद्योगों को नई पहचान देना है. सरकार का दावा है कि इस योजना से प्रदेश के करीब तीन लाख युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है.

गोशालाएं बनेंगी उत्पादन और उद्यमिता के केंद्र

नई योजना के तहत गोशालाओं को केवल पशुओं के संरक्षण  तक सीमित नहीं रखा जाएगा. इन्हें उत्पादन और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. पंचगव्य क्लस्टरों में दूध, दही और घी जैसे उत्पादों के साथ-साथ गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद, जैविक कीटनाशक, धूपबत्ती, साबुन, पेंट और औषधीय उत्पाद तैयार किए जाएंगे. इन उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग और विपणन की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा.

3 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

सरकार की योजना के अनुसार प्रत्येक पंचगव्य क्लस्टर से 40 युवाओं की एक टीम जोड़ी जाएगी. प्रदेश में 7,500 से अधिक गोशालाओं को इस मॉडल से जोड़ने पर लगभग तीन लाख युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे. इस पहल में ग्रामीण युवाओं, किसानों  और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी. ये टीमें उत्पादन, प्रबंधन, विपणन और अन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालेंगी. इससे गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं का पलायन कम करने में भी मदद मिल सकती है.

प्राकृतिक खेती और किसानों को मिलेगा लाभ

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार पंचगव्य क्लस्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगे. गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से प्राकृतिक खेती  को बढ़ावा मिलेगा. इससे किसानों की खेती की लागत घटेगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी. साथ ही किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली जैविक सामग्री स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगी, जिससे कृषि उत्पादन में सुधार की उम्मीद है.

गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल गो संरक्षण, रोजगार और कृषि  को एक साथ जोड़ने का प्रयास है. पंचगव्य आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में नए व्यवसाय विकसित हो सकते हैं. इससे गांवों में आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. सरकार को उम्मीद है कि यह योजना न केवल गोशालाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएगी, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगी.

Published: 29 Jun, 2026 | 11:30 PM

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