cow shelter heatwave protection: उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए सरकार ने गोवंश की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. हर साल गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ गो-आश्रय स्थलों में पशुओं के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गो-आश्रय स्थलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पशुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी.
भीषण गर्मी में गोवंश की सुरक्षा पर खास ध्यान
गर्मी के मौसम में तेज धूप, लू और पानी की कमी से गोवंश पर सीधा असर पड़ता है. कई बार हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियां भी बन जाती हैं. इस खतरे को देखते हुए सरकार ने सभी गो-आश्रय स्थलों में विशेष इंतजाम अनिवार्य कर दिए हैं.
अब हर आश्रय स्थल पर वाटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर, पंखे और पर्याप्त छायादार व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होगा. इससे पशुओं को गर्मी से राहत मिलेगी और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा. इसके साथ ही साफ और ठंडा पेयजल लगातार उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी पशु को पानी की कमी का सामना न करना पड़े.
चारा संकट से निपटने की तैयारी
गर्मी के समय हरे चारे की कमी एक बड़ी समस्या बन जाती है. इसे देखते हुए सरकार ने पहले से ही रणनीति तैयार कर ली है. सभी गो-आश्रय स्थलों में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा और भूसा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने मीडिया को बताया कि, प्रदेश में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. खाली कराई गई जमीन पर हाइब्रिड नेपियर घास बोई जा रही है, जिससे लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनी रहेगी. इसके अलावा गो-आश्रय स्थलों के आसपास छायादार पेड़ भी लगाए जा रहे हैं, ताकि प्राकृतिक रूप से भी ठंडक बनी रहे.
जिलों में दिख रही सक्रियता
सरकार के निर्देशों का असर अब जिलों में साफ दिखाई दे रहा है. अलग-अलग जिलों में स्थानीय स्तर पर नई पहल की जा रही है. जौनपुर में भूसा दान करने वालों को ‘पुण्य की एफडी’ जैसे प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे लोग बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं. वहीं आजमगढ़, बागपत, सहारनपुर और हरदोई जैसे जिलों में कूलर, फॉगर, मिस्टिंग सिस्टम और पंखों की व्यवस्था को मजबूत किया गया है. इससे गो-आश्रय स्थलों का वातावरण पहले से बेहतर हुआ है.
भूसा दान अभियान को मिला जनसमर्थन
प्रदेश में चल रहा भूसा दान अभियान भी तेजी पकड़ रहा है. इसमें आम लोग, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं. महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, एटा, सहारनपुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट और गोरखपुर जैसे जिले इस अभियान में आगे हैं. इन जिलों में बड़ी मात्रा में भूसा इकट्ठा किया जा रहा है, जिससे गो-आश्रय स्थलों में चारे की कमी न हो. इस पहल से यह भी साबित हो रहा है कि समाज और सरकार मिलकर काम करें तो बड़ी समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है.
नियमित निगरानी और सख्ती
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे समय-समय पर गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं की जांच करें. अगर कहीं भी लापरवाही पाई जाती है, तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर गो-आश्रय स्थल में तय मानकों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध हों.
पशुपालकों और किसानों को भी फायदा
इन व्यवस्थाओं का फायदा सिर्फ गो-आश्रय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पशुपालकों और किसानों को भी लाभ मिलेगा. स्वस्थ पशु ही बेहतर उत्पादन देते हैं, जिससे किसानों की आय पर भी सकारात्मक असर पड़ता है. इसके अलावा चारा और पानी की पर्याप्त व्यवस्था से पशुओं की मृत्यु दर भी कम होगी.