UP सरकार ने शुरू की श्वेत समृद्धि योजना, किसानों को दी जाएंगी बेहतर नस्ल की गायें
उत्तर प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजना लागू की जा रही है. इसमें पशुओं की गर्भ जांच अब 28 दिन में होगी और गर्भाधान गैप कम किया जाएगा. साथ ही गौशालाओं की अच्छी नस्ल की गाय किसानों को दी जाएंगी. इससे पशुपालन मजबूत होगा और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.
Shwet Samriddhi Yojana: उत्तर प्रदेश में पशुपालन को मजबूत बनाने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने श्वेत समृद्धि योजना के तहत नई रणनीति तैयार की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि पशुओं के गर्भाधान के बीच का समय कम किया जाए और किसानों को बेहतर नस्ल की गायें दी जाएं. सरकार का मानना है कि इससे दूध उत्पादन तेजी से बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होगा. नई तकनीक और बेहतर व्यवस्था के जरिए पशुपालन को आसान और फायदेमंद बनाने की कोशिश की जा रही है.
गर्भाधान गैप कम करने पर फोकस
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में पशु होने के बावजूद समय पर गर्भधारण न होना एक बड़ी समस्या है. 2019 की 20वीं पशुधन गणना के अनुसार, राज्य में करीब 190.20 लाख गोवंश और 330.10 लाख भैंस हैं. इनमें 89.36 लाख गाय और 153.12 लाख भैंस प्रजनन योग्य हैं. इसके बावजूद करीब एक लाख गाय और भैंस ऐसी हैं, जो समय पर गर्भ धारण नहीं कर पातीं. अभी तक गर्भ की जांच करीब तीन महीने बाद होती है. अगर पशु गर्भवती नहीं होता, तो उसे दोबारा गर्भधारण कराने में 3 से 4 महीने का समय लग जाता है. अब सरकार इस लंबे अंतर को कम करने की तैयारी कर रही है, ताकि पशु जल्दी गर्भ धारण कर सकें और दूध उत्पादन बढ़ सके.
28 दिन में गर्भ जांच, नई तकनीक का इस्तेमाल
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, श्वेत समृद्धि योजना के तहत प्रदेश में आईटी आधारित पशु गर्भपरीक्षण प्रयोगशालाएं बनाई जा रही हैं. इन लैब में खास किट के जरिए सिर्फ 28 दिन में ही यह पता चल जाएगा कि गाय या भैंस गर्भवती है या नहीं. अगर किसी पशु में गर्भ नहीं ठहरता है, तो किसान एक महीने बाद ही दोबारा सीमेन चढ़वा सकेगा. इससे समय की बचत होगी और उत्पादन भी तेजी से बढ़ेगा. साथ ही किसान पशु चिकित्सकों से संपर्क कर इलाज भी जल्दी शुरू कर सकेंगे. इस योजना की शुरुआत बुंदेलखंड, पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच ब्लॉकों से की जा रही है. हर क्षेत्र में एक-एक ब्लॉक चुना गया है.
कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ेगा दूध उत्पादन
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दे रही है. इसके तहत अतिहिमीकृत (फ्रोजन) वीर्य का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे बेहतर नस्ल के पशु तैयार किए जा सकें. सभी पशु अस्पतालों में इस वीर्य को सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक लैब बनाई जा रही हैं. विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से संकर नस्ल तैयार की जाएगी, जो ज्यादा दूध देती है. इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता के पशु मिलेंगे और उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी.
किसानों को मिलेंगी गौशालाओं की अच्छी नस्ल की गायें
श्वेत समृद्धि योजना के तहत गौशालाओं में मौजूद अच्छी नस्ल की गायों को किसानों को दिया जाएगा. गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि कई गौशालाओं में स्वस्थ और दूध देने वाली गायें मौजूद हैं. इन गायों का इलाज कराया गया है और कुछ गर्भवती भी हैं. इन्हें किसानों को सौंपा जाएगा, ताकि वे तुरंत दूध उत्पादन शुरू कर सकें. उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड में यह प्रयोग पहले ही सफल हो चुका है और अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है.