Animal Husbandry: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है. दूध उत्पादन से लेकर बछड़े-बछियों की बिक्री तक, गाय और भैंस परिवार की आर्थिक मजबूती से सीधे जुड़ी होती हैं. लेकिन जब पशु समय पर गर्भधारण नहीं करते, तो यह समस्या पशुपालकों के लिए चिंता का कारण बन जाती है. आम भाषा में इसे बांझपन कहा जाता है. सही जानकारी, संतुलित आहार और समय पर इलाज से इस परेशानी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
बांझपन के प्रमुख कारण
गाय-भैंस में बांझपन कई वजहों से हो सकता है. सबसे आम कारण है हीट (गर्मी) के सही समय की पहचान न कर पाना. यदि पशु के हीट में आने का समय चूक जाए, तो गर्भाधान की संभावना कम हो जाती है.
इसके अलावा पोषण की कमी, शरीर में खून की कमी, गर्भाशय में संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन या बार-बार गर्भपात भी बड़ी वजहें हो सकती हैं. कई बार प्रसव के बाद उचित देखभाल न मिलने से भी अंदरूनी संक्रमण हो जाता है, जिससे पशु दोबारा गर्भधारण नहीं कर पाता.
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संतुलित आहार की अहम भूमिका
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार पशु का स्वास्थ्य उसके आहार पर निर्भर करता है. यदि गाय या भैंस को पर्याप्त और संतुलित भोजन नहीं मिलता, तो उसका शरीर कमजोर हो जाता है और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है.
रोजाना हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित मात्रा में दाना देना जरूरी है. साथ ही मिनरल मिक्सचर और कैल्शियम की नियमित पूर्ति होनी चाहिए. शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर अंडाशय सही तरीके से काम नहीं करते. स्वच्छ और पर्याप्त पानी भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि पानी की कमी से भी स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.
हीट के लक्षण पहचानना जरूरी
समय पर हीट के लक्षण पहचान लेना गर्भधारण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. जब गाय या भैंस बार-बार आवाज करती है, पूंछ उठाती है, बार-बार पेशाब करती है या दूसरे पशु पर चढ़ने की कोशिश करती है, तो यह संकेत हो सकता है कि वह हीट में है. इस दौरान सही समय पर कृत्रिम गर्भाधान या प्राकृतिक गर्भाधान कराया जाए तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है.
संक्रमण और समय पर इलाज
प्रसव के बाद यदि पशु की ठीक से सफाई नहीं की जाती, तो गर्भाशय में संक्रमण हो सकता है. यह संक्रमण बांझपन का एक बड़ा कारण बनता है. अगर पशु में असामान्य स्राव, बुखार या कमजोरी के लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और कृमिनाशक दवा का समय-समय पर उपयोग भी बेहद जरूरी है. इससे शरीर में छिपी बीमारियों को रोका जा सकता है.
अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में बिना डॉक्टर की सलाह के घरेलू नुस्खे या दवाएं दे दी जाती हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है. गलत दवा या गलत मात्रा से पशु के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए किसी भी तरह की समस्या होने पर प्रशिक्षित पशु चिकित्सक की सलाह लेना ही बेहतर विकल्प है.
साफ-सुथरा वातावरण और नियमित देखभाल
पशुओं को स्वच्छ और खुला वातावरण देना जरूरी है. रोजाना थोड़ी देर टहलाना और साफ बाड़ा रखना उनके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. यदि समय रहते संतुलित आहार, सही प्रबंधन और उचित इलाज पर ध्यान दिया जाए, तो गाय-भैंस में बांझपन की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है. स्वस्थ पशु ही किसान की आय का मजबूत आधार बनते हैं, इसलिए उनकी देखभाल में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.