बार-बार कृत्रिम गर्भाधान के बाद भी नहीं हो रहा फायदा? ये छुपी बीमारी है जिम्मेदार.. जान लें उपचार के तरीके

Infertility In Cow: गाय और भैंस में बांझपन की समस्या अक्सर पोषण की कमी, कम वजन और हार्मोन असंतुलन के कारण होती है. समय पर सही आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और पशु चिकित्सक की सलाह से इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है. संतुलित देखभाल से पशु जल्दी गर्भधारण करते हैं और दूध उत्पादन भी बढ़ता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 17 Feb, 2026 | 11:38 AM

Dairy Farming Tips: गांवों में कई किसान अपने घरों में गाय और भैंस पालते हैं. लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब बछिया या पड़िया बड़ी होकर गर्भधारण की उम्र में पहुंचती है, तब भी वे गर्भधारण नहीं कर पातीं. इस समस्या को पशुओं में बांझपन या इनफर्टिलिटी कहा जाता है. बांझपन के कारण पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि समय पर बच्चा न होने से दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है. आइए जानते हैं इसके मुख्य कारण और इससे बचाव के उपाय.

क्या है पशुओं में बांझपन?

जब किसी मादा पशु की प्रजनन क्षमता कम हो जाती है या वह गर्भधारण नहीं कर पाती, तो इसे बांझपन कहा जाता है. कई बार पशु उम्र के हिसाब से परिपक्व हो जाते हैं, लेकिन शरीर के अंदर हार्मोन संतुलन सही न होने के कारण गर्भ नहीं ठहरता. कुछ मामलों में कृत्रिम गर्भाधान (एआई) कराने के बाद भी सफलता नहीं मिलती.

वजन और पोषण की कमी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार पशु की उम्र तो तीन से चार साल हो जाती है, लेकिन उसका वजन जरूरी स्तर तक नहीं पहुंचता. उदाहरण के लिए, यदि बछिया का वजन 260 किलोग्राम से कम है, तो गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है.

इसका मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी है. यदि पशु को पर्याप्त हरा चारा, सूखा चारा, खली, दाना और खनिज मिश्रण नहीं मिलता, तो उसके शरीर का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता. पोषक तत्वों की कमी से हार्मोन असंतुलन भी पैदा हो सकता है, जो बांझपन का कारण बनता है.

हार्मोनल असंतुलन की समस्या

पशुओं में बांझपन का एक बड़ा कारण हार्मोनल बीमारी भी है. जब शरीर में जरूरी हार्मोन सही मात्रा में नहीं बनते, तो पशु में हीट (उष्ण अवस्था) सही समय पर नहीं आती या गर्भ ठहरने में दिक्कत होती है.

ऐसी स्थिति में पशुपालकों को लापरवाही नहीं करनी चाहिए. यदि बार-बार गर्भधारण न हो रहा हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर हार्मोनल उपचार या इंजेक्शन की मदद से समस्या को नियंत्रित कर सकते हैं.

प्राकृतिक तरीके से कैसे करें बचाव?

बांझपन से बचाव के लिए सबसे जरूरी है संतुलित और पौष्टिक आहार. पशु को रोजाना हरा चारा, दाना, खनिज मिश्रण और साफ पानी देना चाहिए.

इसके अलावा:

  • पशु का वजन समय-समय पर जांचते रहें.
  • नियमित टीकाकरण और कृमिनाशक दवा दें.
  • साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.
  • हीट के लक्षणों पर नजर रखें और सही समय पर गर्भाधान कराएं.

प्राकृतिक देखभाल और सही पोषण से अधिकतर मामलों में बांझपन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

पशुओं में बांझपन एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जो मुख्य रूप से पोषण की कमी, कम वजन और हार्मोन असंतुलन के कारण होती है. यदि पशुपालक समय रहते सही देखभाल और चिकित्सकीय सलाह लें, तो इस समस्या से बचा जा सकता है. संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच से पशु स्वस्थ रहेंगे और समय पर गर्भधारण भी करेंगे, जिससे दूध उत्पादन और किसान की आय दोनों बढ़ेंगे.

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