Animal Care: सुबह-सुबह तबेला खुलते ही अगर गाय या भैंस स्वस्थ दिखे और दूध भी अच्छा दे, तो किसान की मेहनत सफल मानी जाती है. लेकिन अक्सर लोग ब्याने के बाद जल्दबाजी या गलत खानपान से पशु की सेहत बिगड़ जाती है. यही गलती दूध उत्पादन को भी सीधा नुकसान पहुंचाती है. पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याने के बाद कुछ दिन की सही देखभाल पूरे साल का फायदा तय कर देती है.
ब्याने के बाद क्यों जरूरी है खास देखभाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्याने के बाद गाय या भैंस के शरीर में अंदरूनी थकान और चोटें होती हैं. इस समय पशु कमजोर रहता है और पाचन तंत्र भी पूरी तरह सामान्य नहीं होता. अगर इस दौर में भारी आहार या ज्यादा नमक दे दिया जाए, तो सूजन, थनों में परेशानी और शरीर में पानी भरने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. यही वजह है कि शुरुआती दिनों में हल्का और संतुलित आहार सबसे जरूरी माना जाता है.
नमक और मिनरल को लेकर बरतें सावधानी
अक्सर देखने को मिलता है कि लोग ब्याने के तुरंत बाद ज्यादा नमक देना शुरू कर देते हैं, जो पशुओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, ब्याने के बाद पहले एक सप्ताह तक नमक नहीं देना चाहिए. अधिक नमक से थनों में सूजन और दूध की समस्या हो सकती है. एक हफ्ते बाद सीमित मात्रा में, करीब 20 ग्राम प्रतिदिन साधारण नमक देना फायदेमंद होता है. साधारण नमक की जगह पशुओं के लिए बना मिनरल मिक्सचर कम मात्रा में देना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
शुरुआती दिनों में कैसा हो आहार
ब्याने के बाद 3 से 4 दिन तक पशु को भारी अनाज, खली या ज्यादा प्रोटीन वाला आहार नहीं देना चाहिए. इस समय हल्का, आसानी से पचने वाला चारा देना बेहतर रहता है. हरा चारा, सूखा भूसा और साफ पानी पर्याप्त मात्रा में देना चाहिए. धीरे-धीरे जब पशु की भूख और पाचन ठीक होने लगे, तब आहार में बदलाव किया जा सकता है. सही शुरुआत दूध उत्पादन को स्थिर बनाए रखती है.
गर्भावस्था में अतिरिक्त खुराक क्यों जरूरी
गाय और भैंस की गर्भावस्था लंबी होती है, इसलिए इस दौरान अतिरिक्त पोषण जरूरी माना जाता है. शुरुआती तीन महीनों में सामान्य आहार दिया जा सकता है, लेकिन मिनरल मिक्सचर की मात्रा बढ़ानी चाहिए. तीन से छह महीने के बीच प्रोटीन युक्त आहार देना शुरू करना चाहिए ताकि बछड़ा स्वस्थ रहे और पशु कमजोर न हो. सही पोषण से आगे चलकर दूध उत्पादन भी बेहतर होता है.
सातवें महीने के बाद रखें विशेष ध्यान
गर्भावस्था के सातवें महीने के बाद पशु की देखभाल और ज्यादा जरूरी हो जाती है. अगर पशु दूध दे रहा हो, तो इस समय दूध निकालना बंद कर देना चाहिए. ऐसा न करने से अगले ब्यांत में दूध की मात्रा कम हो सकती है. गर्भवती पशु को हवादार और उजाले वाली जगह पर रखना चाहिए. प्रसव से तीन महीने पहले रोजाना आहार में करीब एक किलो अतिरिक्त चारा जोड़ना लाभदायक होता है. साथ ही गहरे पानी या तालाब में ले जाने से बचना चाहिए.
सही देखभाल से होगा दोहरा फायदा
सही खानपान और देखभाल से न केवल गाय-भैंस स्वस्थ रहती है, बल्कि नवजात बछड़ा भी मजबूत पैदा होता है. इससे भविष्य में दूध उत्पादन बढ़ता है और पशु लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि थोड़ी सी समझदारी और सही जानकारी से किसान बड़ा नुकसान होने से बच सकते हैं और पशुपालन को मुनाफे का मजबूत जरिया बना सकते हैं.