रसोई में रखी इन 2 चीजों से बढ़ेगा गाय-भैंस का दूध, एक हफ्ते में दिखेगा जबरदस्त असर

कई पशुपालकों का अनुभव है कि अगर पशु पूरी तरह स्वस्थ है और यह मिश्रण लगातार एक हफ्ते तक दिया जाए, तो दूध की मात्रा में धीरे-धीरे बढ़ोतरी नजर आने लगती है. हालांकि हर पशु अलग होता है, इसलिए असर भी अलग-अलग हो सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 15 Jan, 2026 | 12:08 PM

गांव हो या शहर, पशुपालन आज भी लाखों परिवारों की आमदनी का मजबूत सहारा है. गाय-भैंस का दूध अगर ठीक मात्रा में मिले तो घर का खर्च भी चलता है और थोड़ी बचत भी हो जाती है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि पशु पूरी तरह स्वस्थ दिखते हैं, समय पर चारा-पानी भी मिलता है, फिर भी दूध धीरे-धीरे कम होने लगता है. ऐसे में पशुपालक महंगे सप्लीमेंट या दवाओं की ओर भागते हैं, जबकि कई बार समाधान हमारी रसोई में ही मौजूद होता है.

पुराने और अनुभवी पशुपालकों के अनुसार, कुछ घरेलू चीजों को सही तरीके और सही समय पर देने से दूध की मात्रा में फर्क देखा जा सकता है. यह कोई जादू नहीं, बल्कि पशु को अतिरिक्त ऊर्जा और पोषण देने का एक पारंपरिक तरीका है.

दूध कम होने की आम वजहें

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दूध कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. मौसम बदलना, शरीर में कमजोरी, ऊर्जा की कमी, गर्भावस्था के बाद सही देखभाल न होना या फिर चारे में संतुलन की कमी. कई बार पशु बाहर से ठीक दिखता है, लेकिन अंदर से उसे पर्याप्त ताकत नहीं मिल पा रही होती. ऐसे में उसका असर सीधे दूध उत्पादन पर पड़ता है.

रसोई में रखी दो चीजें जो दे सकती हैं सहारा

गांवों में वर्षों से एक घरेलू नुस्खा चला आ रहा है, जिसमें गेहूं का आटा और सरसों का तेल इस्तेमाल किया जाता है. गेहूं के आटे में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो पशु को तुरंत ऊर्जा देता है. वहीं सरसों का तेल शरीर को ताकत देता है और पाचन को भी सहारा पहुंचाता है. जब ये दोनों चीजें साथ दी जाती हैं तो पशु को अतिरिक्त पोषण मिलता है, जिससे दूध की मात्रा पर सकारात्मक असर देखा जा सकता है.

खिलाने का सही तरीका क्यों है जरूरी

सिर्फ चीजें देना ही काफी नहीं होता, सही समय और सही मात्रा भी बहुत मायने रखती है. अगर इन्हें गलत समय पर या ज्यादा मात्रा में दे दिया जाए तो फायदा होने की जगह नुकसान भी हो सकता है. इसलिए इस उपाय को संतुलन के साथ अपनाना जरूरी है.

कब और कैसे दें यह मिश्रण

शाम के समय जब पशु को रोज का चारा और पानी दे दिया जाए, उसके बाद यह मिश्रण देना बेहतर माना जाता है. करीब ढाई सौ ग्राम गेहूं का आटा लें और उसमें ढाई सौ ग्राम सरसों का तेल अच्छी तरह मिलाकर नरम सा गूंथ लें. इसे पशु को धीरे-धीरे खिलाएं. रोज एक बार यही मात्रा काफी होती है.

कितना समय में दिखता है असर

कई पशुपालकों का अनुभव है कि अगर पशु पूरी तरह स्वस्थ है और यह मिश्रण लगातार एक हफ्ते तक दिया जाए, तो दूध की मात्रा में धीरे-धीरे बढ़ोतरी नजर आने लगती है. हालांकि हर पशु अलग होता है, इसलिए असर भी अलग-अलग हो सकता है.

ध्यान रहे कि यह एक पारंपरिक घरेलू उपाय है. अगर पशु बीमार है या दूध अचानक बहुत ज्यादा कम हो गया है, तो पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें. सही देखभाल, संतुलित चारा और थोड़ी समझदारी से पशुपालन को फिर से मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है