तेजी से बढ़ रहा देसी गाय पालन का क्रेज, पशुपालन विभाग ने बताई 5 बड़ी वजहें

भारत की देसी गायें आज किसानों के लिए बड़ा सहारा बन रही हैं. कम खर्च, मजबूत सेहत और हर मौसम में ढलने की क्षमता इन्हें खास बनाती है. जैविक खेती में इनका योगदान बढ़ रहा है, जिससे खेती सस्ती और पर्यावरण सुरक्षित बन रहा है. सरकार भी इनके संरक्षण पर जोर दे रही है.

नोएडा | Published: 27 Mar, 2026 | 11:17 AM

Indigenous Cows: भारत में देसी गायों को सिर्फ पशु नहीं, बल्कि खेती और गांव की जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है. आज जब खेती में खर्च बढ़ रहा है और पर्यावरण को बचाने की बात हो रही है, तब देसी गायें किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर सामने आई हैं. पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, देशी नस्ल की गायें न केवल कम खर्च में पाली जा सकती हैं, बल्कि ये खेती को टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी बनाती हैं. यही वजह है कि इन नस्लों को बचाना और बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है.

जलवायु के अनुसार ढलने की खासियत

पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार,भारत का मौसम  हर राज्य में अलग-अलग होता है-कहीं ज्यादा गर्मी, कहीं ज्यादा ठंड, तो कहीं नमी. लेकिन देसी गायों की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे हर तरह के मौसम में खुद को आसानी से ढाल लेती हैं. यही कारण है कि इन्हें पालने में किसानों को ज्यादा परेशानी नहीं होती. विदेशी नस्लों के मुकाबले देसी गायें गर्मी और बीमारियों को बेहतर तरीके से झेल लेती हैं, जिससे उनका पालन आसान और सुरक्षित हो जाता है.

कम खर्च में ज्यादा फायदा

आज के समय में खेती और पशुपालन  दोनों में लागत बढ़ती जा रही है. ऐसे में देसी गायें किसानों के लिए राहत लेकर आती हैं. इन्हें महंगे चारे या खास देखभाल की ज्यादा जरूरत नहीं होती. साधारण चारा और गांव के आसपास मिलने वाली चीजों से ही इनका पालन हो जाता है. इससे किसानों का खर्च कम होता है और उन्हें ज्यादा मुनाफा मिल पाता है. यही वजह है कि छोटे और मध्यम किसान देसी नस्लों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

कम खर्च में देसी गायें बना रहीं खेती को टिकाऊ और मजबूत.

बीमारियों से मजबूत लड़ाई

देसी गायों की एक और खासियत उनकी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता है. यानी ये आसानी से बीमार नहीं पड़तीं. इससे किसानों को दवाइयों  और इलाज पर कम खर्च करना पड़ता है. साथ ही, दूध की गुणवत्ता भी अच्छी बनी रहती है. जहां विदेशी नस्लों को ज्यादा देखभाल और दवाइयों की जरूरत होती है, वहीं देसी गायें प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहती हैं. इससे किसानों का जोखिम भी कम हो जाता है.

जैविक खेती में बड़ा योगदान

आजकल लोग केमिकल फ्री  यानी जैविक खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. इसमें देसी गायों की भूमिका बहुत अहम है. इनके गोबर और गौमूत्र का इस्तेमाल खेतों में प्राकृतिक खाद और कीटनाशक के रूप में किया जाता है. इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और फसल भी ज्यादा सुरक्षित होती है. यही नहीं, इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता. इस तरह देसी गायें खेती को पूरी तरह प्राकृतिक और टिकाऊ बनाने में मदद करती हैं.

किसानों और पर्यावरण का भविष्य सुरक्षित

पशुपालन और डेयरी विभाग  का मानना है कि अगर देसी गायों को बचाया और बढ़ावा दिया जाए, तो इससे किसानों की आय बढ़ सकती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा. देसी नस्लें गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं और खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाती हैं. यही वजह है कि सरकार भी इन नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दे रही है. देसी गायें सिर्फ दूध देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खेती, पर्यावरण और किसानों के भविष्य को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाती हैं. आज जरूरत है कि हम इनके महत्व को समझें और इन्हें अपनाकर एक बेहतर और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाएं.

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